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उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव: भाजपा और सपा के बीच सीटों का बंटवारा

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के हालिया चुनाव परिणामों में भाजपा ने 6 और सपा ने 4 सीटें जीती हैं। वाराणसी खंड स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने बढ़त बनाई हुई है, जबकि भाजपा के केदारनाथ सिंह ने अपनी हार स्वीकार की है। जानें और क्या है इस चुनाव में खास।
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चुनाव परिणामों का संक्षिप्त विवरण


उत्तर प्रदेश विधान परिषद के खंड शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों में से 10 के परिणाम घोषित हो चुके हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6 सीटें जीती हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने 4 सीटें हासिल की हैं।


वाराणसी खंड स्नातक सीट पर मतगणना लगभग 52 घंटे से चल रही है, जहां सपा के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने बढ़त बनाई हुई है। हालांकि, इस सीट के परिणाम की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।


भाजपा के केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी हार को स्वीकार करते हुए अपने समर्थकों का आभार व्यक्त किया है।


आधिकारिक परिणामों के अनुसार, मेरठ खंड स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश कुमार गोयल, लखनऊ खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी, और वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की है।


आगरा खंड शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल, आगरा खंड स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, और इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मानसिंह यादव ने भी जीत हासिल की।


इसके अलावा, मेरठ खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंदर शर्मा, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी ने भी जीत दर्ज की।


लखनऊ खंड स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह ने जीत हासिल की है। जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है और उन्हें निर्वाचन प्रमाणपत्र भी सौंपा गया है। इस प्रकार, अब तक घोषित 10 परिणामों में भाजपा को 6 और सपा को 4 सीटें मिली हैं।


वाराणसी खंड स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा लगभग 17 हजार मतों से आगे चल रहे हैं।


भाजपा के केदारनाथ सिंह ने फेसबुक पर लिखा, “मैं जनादेश को पूरी विनम्रता और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करता हूं। इस चुनाव में हमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन आप सभी का स्नेह और सहयोग मेरे लिए अमूल्य है।”


उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में सफलता और असफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन जनसेवा का संकल्प किसी परिणाम पर निर्भर नहीं होता।


उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था, और मतगणना 27 अक्टूबर को सुबह 8 बजे शुरू हुई।