उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने लोकतंत्र की मजबूती पर जोर दिया
लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरूक विधायिका की आवश्यकता
पटना/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए विधायिका का सशक्त और जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान ने विधायिका को महत्वपूर्ण शक्तियां दी हैं, जिससे विधायक की पहचान विधानसभा से बनती है। सहमति और असहमति, संवाद और सार्थक चर्चा लोकतंत्र की मूल भावना को सशक्त बनाते हैं।
बिहार विधानसभा के नए और मौजूदा सदस्यों के लिए गया जी में आयोजित दो दिवसीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ में महाना ने विधायकों को संसदीय परंपराओं और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों के बारे में मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था लोकतांत्रिक है, न कि राजशाही। शासन अब बैलेट की ताकत से संचालित होता है। लोकतंत्र के चार स्तंभों की अपनी-अपनी भूमिकाएं और जिम्मेदारियां हैं, और विवाद तब उत्पन्न होते हैं जब एक स्तंभ दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है। इसलिए सभी स्तंभों को अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर कार्य करना चाहिए।
महाना ने कहा कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच विश्वास का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी जनता से यह वादा नहीं किया कि हर कार्य पूरा होगा, लेकिन हमेशा यह भरोसा दिलाया कि जनहित के कार्यों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किया जाएगा। जब जनता को विश्वास होता है कि उनका प्रतिनिधि उनके हितों के लिए प्रयासरत है, तो यही विश्वास लोकतंत्र को मजबूत करता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनता को अपने प्रतिनिधि पर भरोसा होना चाहिए कि वह उनके हितों की रक्षा करेगा। जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक होती हैं, और इन्हें पूरा करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की समितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और कार्यपालिका की इन समितियों के प्रति जवाबदेही तय है।
महाना ने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को केवल पद और प्रभाव बढ़ाने के लिए नहीं चुना है, बल्कि उन्हें जनसेवा का अवसर दिया है। वर्तमान समय तकनीक का युग है, और जनप्रतिनिधियों की गतिविधियां जनता की निगाह में रहती हैं। इसलिए विधायकों का जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम होना आवश्यक है। ज्ञान और निरंतर अध्ययन के माध्यम से ही जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकते हैं।
बिहार विधानसभा सचिवालय, लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) और बिहार सरकार के बिपार्ड द्वारा 11 और 12 जुलाई, 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विधायकों को सदन की कार्यवाही और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों की बेहतर समझ प्रदान करना था।
इस प्रबोधन कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, और बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
