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उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी और चुनावी तैयारियों की हलचल

उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी की स्थिति फिर से उभर आई है। केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई और पार्टी नेताओं के बीच की खींचतान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हरीश रावत ने अपनी 'धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा' शुरू की है, जिससे पार्टी नेतृत्व चिंतित है। क्या कांग्रेस अपनी चुनावी रणनीति को सही दिशा में ले जा पाएगी? जानें इस लेख में।
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कांग्रेस पार्टी में बढ़ती गुटबाजी


उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर से गुटबाजी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पार्टी को इस समय दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की कार्रवाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के नेता आपस में उलझे हुए हैं। हाल ही में, ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी और वर्तमान में उनके पीए चंदन जीना के घर पर छापा मारा, जहां से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि बरामद की गई। इस घटना के बाद, हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया, हालांकि ऐसा करने के लिए किसी ने उन पर दबाव नहीं डाला था। यह माना जा रहा था कि वे नेतृत्व की दौड़ से खुद को अलग कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।


हरीश रावत की नई रणनीति

हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग करने के बजाय अपनी तैयारी को और गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। उन्होंने पूरे राज्य में 'धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा' की शुरुआत की, जिसके लिए उन्होंने न तो किसी से चर्चा की और न ही पार्टी आलाकमान से अनुमति ली। इसके बाद, उनकी शिकायत पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची, जिसके चलते मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें दिल्ली बुलाया। बताया जा रहा है कि खड़गे ने उनसे अपनी यात्रा को स्थगित करने के लिए कहा। उन्हें बताया गया कि पार्टी जल्द ही सभी नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोंदियाल और विधायक दल के नेता यशपाल आर्य भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। कांग्रेस अभी यह तय नहीं कर पा रही है कि ब्राह्मण और दलित समीकरण पर जाए या ठाकुर को भी इसमें शामिल करे। भाजपा की ओर से पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री हैं, जिससे ठाकुर वोटों के टूटने की संभावना कम नजर आ रही है।