उत्तराखंड में मल्लिकार्जुन खड़गे का विवाद: भाजपा की चिंता बढ़ी
भाजपा में मल्लिकार्जुन खड़गे के विवाद पर चिंता
भारतीय जनता पार्टी के भीतर मल्लिकार्जुन खड़गे के मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ गई है। भले ही पार्टी के नेता सार्वजनिक रूप से कुछ और कह रहे हों, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि चुनाव के नजदीक आने पर उत्तराखंड में यह विवाद पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इस स्थिति को संभालने के लिए पार्टी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष को आगे आना पड़ा। स्थानीय नेताओं ने इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की, जिसे राइटविंग इकोसिस्टम में काफी प्रचारित किया गया। संतोष ने कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक रैली के दौरान 'अल्लाहू अकबर' के नारे लगे थे, इसलिए शुद्धीकरण किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस शुद्धीकरण में कई दलित शामिल थे, इसलिए यह दलितों का अपमान नहीं है।
हालांकि, शुद्धीकरण में शामिल दलितों ने कुछ और ही कहा है। एक वीडियो में उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि वहां क्या होने वाला है और उन्हें बताया गया था कि वहां प्रसाद बंटने वाला है। इसके अलावा, राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया पर खड़गे के कार्यक्रम का पूरा वीडियो साझा किया है, जिसमें कोई धार्मिक नारे नहीं लगे हैं। इसलिए, इसे सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश शायद सफल नहीं होगी।
भाजपा को उम्मीद है कि इस विवाद के जरिए वह उत्तराखंड की राजनीति में ब्राह्मण और ठाकुर जातियों को अपने पक्ष में कर लेगी। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि उत्तराखंड में दलितों की आबादी 19 प्रतिशत और मुस्लिमों की 14 प्रतिशत है। यदि ये वोट कांग्रेस के साथ एकजुट होते हैं, तो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, खड़गे के मामले का असर उत्तराखंड के बाहर भी अन्य राज्यों में देखने को मिल सकता है।
