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उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका: 6 बागी सांसदों का शिंदे गुट में विलय

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक बड़ा झटका लगा है, जब लोकसभा अध्यक्ष ने छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी दी। इस घटनाक्रम ने ठाकरे के खेमे में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है, जिससे उनकी पार्टी की संख्या घटकर 3 रह गई है। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी और आगामी मानसून सत्र में इसके प्रभाव।
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संसद के मानसून सत्र से पहले का राजनीतिक संकट

नई दिल्ली - 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) को एक गंभीर झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है।


लोकसभा सचिवालय से सभी छह सांसदों के विलय की स्वीकृति मिलने से यह स्पष्ट हो गया है कि उद्धव गुट के सांसद अब शिंदे गुट का हिस्सा बन गए हैं। इस प्रकार, शिंदे गुट के पास लोकसभा में कुल 13 सांसद हो गए हैं। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को भी अलग बैठने की अनुमति मिल गई है, जो एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं।


एकनाथ शिंदे की शिवसेना में 6 यूबीटी सांसदों के विलय पर शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 2022 में जब उनकी पार्टी को तोड़ा गया, तब से वे संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन, अब तक उन्हें यह समझ नहीं आया कि उनकी गलती क्या थी। उनकी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह चुराया गया है, जिसमें तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका स्पष्ट है। अब 2026 में एक बार फिर उनकी पार्टी को तोड़ दिया गया है।


दुबे ने आगे कहा कि जब वे अदालत जाते हैं, तो समय लगता है और तारीख पर तारीख मिलती है। इस बार जिन सांसदों को चुराया गया, उन्हें एकनाथ शिंदे की शिवसेना का सांसद बताया जा रहा है, जबकि वे उनके नाम और चुनाव चिन्ह पर चुने गए थे। लोकसभा स्पीकर ने बिना दोनों पक्षों को सुने अपना फैसला सुनाया, जो लोकतंत्र की कमजोरी को दर्शाता है।


पिछले महीने, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 'ऑपरेशन टाइगर' को अंजाम दिया, जिसके तहत उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में फूट पड़ गई। यूबीटी गुट के छह लोकसभा सांसद अब औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं।


इन छह बागी सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं।


इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, लोकसभा में शिवसेना यूबीटी की संख्या 9 से घटकर 3 हो गई है, जबकि शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। उद्धव ठाकरे के खेमे में अब केवल अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक) बचे हैं।


इस बार का मानसून सत्र बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच शुरू हो रहा है। एनडीए की कोशिश है कि संसद में अपनी ताकत बढ़ाकर कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जाए। सरकार की प्राथमिकता महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की है, जिसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। वहीं, विपक्ष सरकार को नीट पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद, महंगाई और अन्य मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।