उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल, राज ठाकरे ने मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की
उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर आरोप
मुंबई। शिवसेना (उबाठा) के नेता उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि वे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसी बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और भविष्य के चुनावों को मतपत्र के माध्यम से कराने की मांग की।
उद्धव और राज ठाकरे के नेतृत्व में मुंबई में आयोजित 'विराट गर्जना मोर्चा' में हजारों लोगों ने भाग लिया। इस मार्च के बाद हुई रैली में कांग्रेस के नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार, साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए।
उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाया कि यदि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची से बांग्लादेशियों को हटाना था, तो सरकार को बताना चाहिए कि कितने अवैध बांग्लादेशियों का पता लगाया गया है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को भाजपा का 'हथियार' करार दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के तहत एसआईआर के दौरान दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उद्धव ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम भी इसी तरह हटाए गए हैं।
उद्धव ने भाजपा नेताओं के खिलाफ नूर्नबर्ग मुकदमों की तर्ज पर कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'भाजपा और इन अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि देश में भी ऐसा ही होगा।'
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों की लड़ाई किसी एक पार्टी या नेता के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए है। उद्धव ने कहा, 'भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि लोग अभी शांत हैं। अगर वे आक्रोशित हो गए, तो वे इसका सिंहासन जला देंगे।'
उद्धव ने भाजपा पर न केवल वोट और विधायकों को 'चुराने' का आरोप लगाया, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे को भी 'चुराने' का आरोप लगाया।
शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख ने उच्चतम न्यायालय की भी आलोचना की, जिसने पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई नहीं की। यह मामला राज्य में उपचुनाव से एक दिन पहले उठाया गया था। अदालत इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेगी, जबकि राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं।
उद्धव ने कहा, 'यह दिखाता है कि वे सभी संस्थानों को किस तरह नियंत्रित कर रहे हैं।' राज ठाकरे ने एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि भविष्य के चुनावों को मतपत्र के माध्यम से कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वे 2017-18 से राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन निकाय में कथित 'अनियमितताओं' के बारे में बता रहे हैं।
मनसे प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची के मुद्दे पर सोनिया गांधी और ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह किया था जब तक कि इन मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता।
दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ विरोध मार्च बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय तक पहुंचा। इस मार्च में सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की गई।
मार्च में राजनीतिक दलों के झंडे ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय तिरंगा साथ रखने को कहा गया था। प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शहर एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। उन्होंने सभी भारतीयों से एकजुट होने का आह्वान किया, 'अब या कभी नहीं।'
