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एक देश-एक चुनाव: जेपीसी की रिपोर्ट और संभावित आर्थिक लाभ

जेपीसी अध्यक्ष प्रेम प्रकाश चौधरी ने लखनऊ में 'एक देश-एक चुनाव' पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि समिति ने दस राज्यों का दौरा किया, जहां 99 प्रतिशत मतदाताओं ने इस विचार का समर्थन किया। चौधरी ने संघीय ढांचे पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया। इसके साथ ही, उन्होंने इस व्यवस्था के संभावित आर्थिक लाभों का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकारी खजाने को सात लाख करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेपीसी अध्यक्ष का बयान


लखनऊ में बुधवार को 'एक देश-एक चुनाव' की रूपरेखा पर चर्चा करने के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश (पीपी) चौधरी ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने बताया कि समिति ने तीन दिवसीय अध्ययन दौरे के दौरान दस राज्यों का दौरा किया है, जहां लगभग 99 प्रतिशत मतदाताओं और विभिन्न हितधारकों ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया है। चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के सतत विकास के लिए की जा रही है।


संघीय ढांचे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं

जेपीसी अध्यक्ष ने विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए संघीय ढांचे के सवालों को खारिज करते हुए ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1952 से 1967 तक लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे, और उस समय देश के संघीय ढांचे को कोई खतरा नहीं था। उन्होंने बताया कि 1968 में कांग्रेस सरकार द्वारा कुछ विधानसभाओं को भंग करने के कारण चुनावी चक्र असंतुलित हो गया था, जिसे अब सही करने का प्रयास किया जा रहा है।


आर्थिक लाभ का अनुमान

चौधरी ने इस व्यवस्था के आर्थिक लाभों को आंकड़ों के माध्यम से स्पष्ट किया। उनका कहना है कि बार-बार चुनावों और आचार संहिता के कारण विकास परियोजनाएं, उद्योग, शिक्षा और सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। यदि एक साथ चुनावों की व्यवस्था लागू होती है, तो सरकारी खजाने और देश की अर्थव्यवस्था को लगभग सात लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके अलावा, बार-बार मतदान के लिए अपने गृह राज्यों में लौटने वाले लगभग पांच करोड़ प्रवासी श्रमिकों को भी राहत मिलेगी।


2029 से चरणबद्ध कार्यान्वयन की योजना

चुनावों को एक साथ कराने की व्यावहारिक तैयारियों पर चर्चा करते हुए, समिति ने बताया कि चुनाव आयोग ने पूरे देश में एक साथ मतदान कराने के लिए छह महीने की तैयारी का समय देने पर सहमति जताई है। जेपीसी अध्यक्ष के अनुसार, यदि संसद 2028 में संबंधित विधेयक को मंजूरी देती है, तो 2029 का आम चुनाव 'एक देश-एक चुनाव' की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके साथ ही, बार-बार सरकारें गिरने की समस्या से निपटने के लिए समिति अविश्वास प्रस्ताव और अनिवार्य 'सकारात्मक विश्वास प्रस्ताव' जैसी कानूनी व्यवस्थाओं पर भी विचार कर रही है।