एनडीए में पार्टियों की स्थिति में बदलाव: भाजपा की बढ़ती ताकत
एनडीए में पार्टियों की स्थिति
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में सांसदों और विधायकों की संख्या स्थिर बनी हुई है, लेकिन पार्टियों की स्थिति में गिरावट देखी जा रही है। हाल ही में, एनडीए में भाजपा के बाद दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी पार्टियों की रैंकिंग में कमी आई है। चौथी और पांचवीं पार्टियों की स्थिति भी कमजोर हुई है। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी, जो पहले दूसरे स्थान पर थी, अब एक रैंक नीचे चली गई है। उनके पास अब 16 लोकसभा सांसद हैं और राज्यसभा में उनकी संख्या चार हो गई है।
नीतीश कुमार की पार्टी, जो पहले तीसरे स्थान पर थी, अब चौथे स्थान पर आ गई है। यह बदलाव एनडीए विरोधी पार्टियों में हो रही टूट के कारण हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 240 सीटें जीती थीं। एनडीए की सहयोगी टीडीपी और जनता दल यू क्रमशः 16 और 12 सीटों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर थीं।
हालांकि, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया है और अब वे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए हैं। इससे यह पार्टी अचानक एनडीए सहयोगियों की सूची में दूसरे स्थान पर आ गई है। नीतीश की पार्टी अब चौथे स्थान पर है।
इसके अलावा, उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं, जिससे शिवसेना की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इस प्रकार, नीतीश की पार्टी अब पांचवें स्थान पर आ गई है।
आगे चलकर, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी छठे स्थान पर जा सकती है। यदि शरद पवार की एनसीपी का विलय सुनेत्रा पवार की एनसीपी में होता है, तो उनकी संख्या बढ़कर नौ हो जाएगी। इस प्रकार, भाजपा की निर्भरता सहयोगी पार्टियों पर कम होती जा रही है। एनडीए का बहुमत अब एनसीपीआई और शिवसेना के दम पर बनता है।
