Newzfatafatlogo

एनसीपी में बढ़ते विवाद और भाजपा की रणनीति

एनसीपी में आंतरिक विवाद गहराता जा रहा है, जिसमें सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की भूमिका प्रमुख है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने पार्टी के भीतर असंतोष व्यक्त किया है, जिससे पार्टी टूटने की संभावना बढ़ गई है। भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जानें इस राजनीतिक खींचतान के पीछे की कहानी और भाजपा की रणनीति क्या हो सकती है।
 | 

एनसीपी में आंतरिक संघर्ष


एनसीपी में हालिया विवाद भाजपा की सहयोगी एनसीपी के भीतर गहराता जा रहा है, खासकर सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने खुलकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। दोनों नेता सुनेत्रा के बेटे पार्थ पवार की बढ़ती ताकत और उनके संवाद के तरीके से असंतुष्ट हैं। पार्थ का रवैया पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रति भी नकारात्मक है, जिससे पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है। सुनेत्रा ने चुनाव आयोग को जो सूची भेजी है, उसमें अधिकांश नाम उनके परिवार या पार्थ के करीबी दोस्तों के हैं। इस स्थिति के चलते, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने पार्टी को तोड़ने का सुझाव दिया है।


सूत्रों के अनुसार, नाराज नेताओं ने अमित शाह से चर्चा की, जिसके बाद देवेंद्र फड़नवीस को इस मामले की जानकारी दी गई। फड़नवीस ने इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई और दोनों नेताओं ने उनसे मुलाकात की। सुनेत्रा पवार की राजनीतिक गतिविधियां फड़नवीस के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलती हैं। भाजपा एनसीपी को एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खिलाफ एक संतुलन के रूप में देखती है। इस खींचतान के बीच, भाजपा के पास यह विकल्प है कि वह सुनेत्रा और शरद पवार की एनसीपी के विधायकों और सांसदों को तोड़कर सीधे भाजपा में शामिल कर ले। हालांकि, भाजपा इस दिशा में कदम उठाने से बच रही है। इस मुद्दे पर दिल्ली से मुंबई तक लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें अमित शाह, देवेंद्र फड़नवीस, एकनाथ शिंदे, शरद पवार और सुनेत्रा पवार शामिल हैं।