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ओम माथुर का केरल में शाकाहारी भोजन का आदेश विवादित

भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम माथुर को हाल ही में केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने लोकभवन में केवल शाकाहारी भोजन परोसने का आदेश दिया है, जो राज्य की मांसाहारी संस्कृति के खिलाफ है। इस निर्णय ने विवाद को जन्म दिया है, क्योंकि केरल की अधिकांश जनसंख्या मांसाहार करती है। जानें इस आदेश के पीछे की राजनीति और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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ओम माथुर का नया कार्यकाल


भाजपा के अनुभवी नेता ओम माथुर को हाल ही में सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था, लेकिन अब उन्हें केरल भेजा गया है। केरल के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु में स्थानांतरित किया गया है, जहां उन्होंने आरएन रवि की जगह ली है, जिन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है।


केरल पहुंचते ही ओम माथुर ने एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने घोषणा की कि लोकभवन में केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाएगा। यह आदेश राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने सिक्किम में ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था, जबकि वहां की जनसंख्या मांसाहार का सेवन करती है।


केरल में, जहां लगभग 95 प्रतिशत लोग मांसाहार करते हैं, यह आदेश विवाद को जन्म दे रहा है। राज्य की 45 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम और ईसाई समुदाय से है, जबकि 55 प्रतिशत हिंदू आबादी में भी अधिकांश लोग मांसाहार करते हैं। यह उनके सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा है।


हालांकि, राज्यपाल का व्यक्तिगत शाकाहार कोई समस्या नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी पसंद को सभी पर थोपने का प्रयास किया है। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए, उनसे बेहतर निर्णय की अपेक्षा की जा रही थी। भाजपा की राजनीतिक शक्ति को प्रदर्शित करने का यह तरीका विवादास्पद साबित हो रहा है। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा ने इसी तरह का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें पीछे हटना पड़ा। केरल में भी इस आदेश का कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा। यह देखना आश्चर्यजनक है कि ओम माथुर जैसे वरिष्ठ नेता को अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए इस तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं!