ओल्ड मॉन्क रम विवाद: बॉम्बे हाई कोर्ट में पहुंचा मामला, जानें क्या है असली सच
कोर्ट में ओल्ड मॉन्क का मामला
नई दिल्ली: ओल्ड मॉन्क रम के बिक्री को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट में पहुंच चुका है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अदालत में कहा है कि उत्पाद की असली पहचान उसके नाम या लेबल से अधिक महत्वपूर्ण है। नियामक के अनुसार, ओल्ड मॉन्क में मुख्य रूप से न्यूट्रल स्पिरिट का उपयोग किया गया है, इसलिए इसे रम फ्लेवर्ड स्पिरिट के अंतर्गत रखा जा सकता है।
FSSAI का तर्क
अदालत में FSSAI के वकील ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल बोतल पर लिखे नाम का नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उत्पाद में किस प्रकार की स्पिरिट का उपयोग किया गया है। नियामक ने बताया कि इसमें न्यूट्रल स्पिरिट के साथ रम फ्लेवर मिलाया गया है। कंपनी ने अपने लेबल में बदलाव कर नए लेबल FSSAI को प्रस्तुत किए हैं, लेकिन नियामक ने इनकी जांच के लिए अदालत से और समय मांगा है। अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।
महाराष्ट्र में बिक्री पर रोक
यह विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर कार्रवाई की गई। जांच में पाया गया कि उत्पाद में न्यूट्रल स्पिरिट के साथ फ्लेवरिंग सामग्री थी, जिसके बाद FSSAI ने इसकी बिक्री पर रोक लगा दी। कंपनी ने बाद में पैकेजिंग में बदलाव करने पर सहमति जताई और बोतल पर एडेड फ्लेवर को प्रमुखता से दिखाने का वादा किया।
FSSAI की व्यापक जांच
FSSAI की कार्रवाई केवल ओल्ड मॉन्क तक सीमित नहीं है। नियामक कई अन्य उत्पादों में बाहरी फ्लेवर के उपयोग, उम्र से संबंधित दावों और भ्रामक लेबलिंग की भी जांच कर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि कुछ निर्माता ऐसे फ्लेवर का उपयोग कर रहे थे, जो उत्पादों को रम या व्हिस्की जैसा स्वाद और सुगंध देते हैं। मंत्रालय का कहना है कि ऐसे उत्पादों को उनकी असली पहचान के अनुसार रम फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की फ्लेवर्ड स्पिरिट के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
7 Years Old का दावा विवादित
जांच में ओल्ड मॉन्क XXX Rum की बोतल पर '7 years old blended' का दावा भी भ्रामक पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इसमें मुख्य मात्रा बिना परिपक्व की गई न्यूट्रल स्पिरिट की थी, जबकि परिपक्व रम स्पिरिट की मात्रा 5 प्रतिशत से भी कम थी। नियमों के अनुसार, मिश्रित स्पिरिट की उम्र का दावा उसमें मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर किया जाना चाहिए।
