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कंगना रनौत ने मंडी में अधिकारियों को लगाई फटकार, कहा- 40% सरकारी धन गलत हाथों में जाता है

हिमाचल प्रदेश की सांसद कंगना रनौत ने मंडी में अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी धन का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा गलत हाथों में चला जाता है। उन्होंने विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों से जवाब मांगा और कहा कि अब बात करने का समय नहीं रहा, काम पूरा करना होगा। कंगना ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं की गुणवत्ता और उनके सही कार्यान्वयन पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके इस बयान ने सरकारी जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
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हिमाचल प्रदेश की सांसद का कड़ा बयान


हिमाचल समाचार: मंडी लोकसभा क्षेत्र की सांसद कंगना रनौत ने शनिवार को विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का सही उपयोग होना चाहिए और इसे गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए। सांसद ने यह भी बताया कि जनता के पैसे का लगभग '30 से 40 प्रतिशत' हिस्सा गलत तरीके से इस्तेमाल होता है।


अधिकारियों की क्लास

मंडी जिले में 'डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेशन एंड मॉनिटरिंग कमिटी' (DISHA) की बैठक में, कंगना ने अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन और जनता के धन के उपयोग पर सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि जनता का पैसा गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए और इसके लिए बेहतर निगरानी की आवश्यकता है।


अधूरे कामों पर सवाल

रनौत ने अधूरे कार्यों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से पूछा कि जब मीडिया उनके क्षेत्र में विकास कार्यों के बारे में पूछे, तो उन्हें क्या उत्तर देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अब बात करने का समय नहीं रहा। ये मामले दो साल पुराने हैं। काम पूरा करो और मुझे बताओ कि क्या हुआ!' कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन कोई काम नहीं हुआ।


कड़ी निगरानी का निर्देश

सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र प्रायोजित योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन गांवों और लोगों तक पहुंचनी चाहिए जिन्हें वास्तव में इनकी आवश्यकता है। उन्होंने विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही।


पहले भी की है आलोचना

कंगना रनौत पहले भी DISHA बैठकों में अधिकारियों के कामकाज पर असंतोष व्यक्त कर चुकी हैं। अक्टूबर 2025 में हुई एक बैठक में उन्होंने अधिकारियों को गंभीरता से काम करने की चेतावनी दी थी। उनके हालिया बयान ने मंडी में सरकारी जवाबदेही और सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से उजागर किया है।