Newzfatafatlogo

कर्नाटक में कांग्रेस का नया उत्थान, शिवकुमार की रणनीतियों का असर

डीके शिवकुमार के कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस पार्टी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। पहले गुटबाजी की आशंका थी, लेकिन शिवकुमार ने भाजपा के विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराकर कांग्रेस को एक अतिरिक्त जीत दिलाई। वर्तमान में, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में भी कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है। शिवकुमार की सरकार ने परमानेंट रेजिडेंसी सर्टिफिकेट जारी कर चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाया है, जिससे मतदाता सूची में नाम शामिल कराने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
 | 

कर्नाटक में कांग्रेस का कायाकल्प


डीके शिवकुमार के कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस पार्टी में एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि सिद्धारमैया को हटाने से पार्टी में फूट बढ़ेगी और शिवकुमार के लिए कार्य करना कठिन होगा। लेकिन इसके विपरीत, शिवकुमार ने एमएलसी चुनाव में भाजपा के 11 विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराकर कांग्रेस के लिए एक अतिरिक्त उम्मीदवार को जीत दिलाई। वर्तमान में, राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में भी कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि भाजपा उसकी बराबरी करने की कोशिश कर रही है।


दरअसल, एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही, डीके शिवकुमार की सरकार ने परमानेंट रेजिडेंसी सर्टिफिकेट जारी करना शुरू कर दिया। इसका मुख्य लाभ यह है कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई प्रमाणपत्र नहीं है, तो भी उसे मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है। कांग्रेस के नेता इसे एक चाल बताते हुए कहते हैं कि चुनाव आयोग भी किसी का नाम नहीं काट पाएगा। हालांकि, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने भी ऐसी व्यवस्था की थी, जिसके बावजूद 27 लाख से अधिक लोगों के नाम काट दिए गए थे। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कर्नाटक की शिवकुमार सरकार ने इससे सीख ली है।