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कर्नाटक में फॉर्म सात विवाद: मुख्यमंत्री का धरना और चुनावी गड़बड़ियों की मांग

कर्नाटक में फॉर्म सात के माध्यम से मतदाताओं के नाम कटवाने के मामले में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने धरना दिया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से गड़बड़ियों को रोकने की मांग की और कहा कि जब तक संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं होती, वे धरने से नहीं उठेंगे। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग इस प्रक्रिया में शामिल हैं और 45 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों में गड़बड़ियाँ पाई गई हैं। इस विवाद ने राज्य में राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है।
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कर्नाटक में सियासी हलचल


बेंगलुरू में गुरुवार को कर्नाटक में फॉर्म सात के माध्यम से मतदाताओं के नाम कटवाने के मामले में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गईं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस मुद्दे पर धरना दिया और चुनाव अधिकारियों से गड़बड़ियों को रोकने की अपील की। उन्होंने सुबह राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया।


शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक फॉर्म सात के दुरुपयोग में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं होती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की कि एसआईआर में गड़बड़ियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। राहुल गांधी ने भी इस मांग का समर्थन किया।


मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 45 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों में गड़बड़ियाँ पाई गई हैं, जिसमें भाजपा के लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें या उनकी पुलिस चुनाव आयुक्तों पर सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती हैं, इसलिए वे आयोग से जांच की मांग कर रहे हैं।


कर्नाटक में आठ अगस्त 2026 तक एसआईआर का पहला चरण पूरा हुआ, जिसमें 5.54 करोड़ मतदाता थे। इस प्रक्रिया के दौरान 1.08 करोड़ नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 4.46 करोड़ रह गई। शिवकुमार ने बताया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में लोगों को पहले से भरे हुए फॉर्म सात दिए गए, जिनमें वोटरों के नाम, पते और इपिक नंबर पहले से दर्ज थे।


मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 70 प्रतिशत से अधिक बूथों पर भाजपा से जुड़े नेताओं ने फॉर्म सात लिए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ लोगों ने दर्जनों और कुछ ने सैकड़ों आवेदन जमा किए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी को एक पत्र लिखा है, जिसमें क्षेत्रवार नाम काटने की जानकारी दी गई है।