कांग्रेस का नया रणनीति: सरकार के हर कदम पर सवाल उठाना
कांग्रेस की सक्रियता
कांग्रेस पार्टी ने यह तय किया है कि वह सरकार को आराम नहीं लेने देगी। इसके लिए, पार्टी ने हर निर्णय को संदिग्ध बनाने और हर कदम पर सवाल उठाने का निर्णय लिया है। यह स्पष्ट नहीं है कि इससे राजनीतिक लाभ मिलेगा या नहीं, लेकिन भाजपा और सरकार को जवाब देने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और अन्य विवादों को छोड़कर, हाल के दो मामलों में कांग्रेस ने ऐसे मुद्दे उठाए हैं जिनमें पहली नजर में कोई गड़बड़ी नहीं दिखती, लेकिन पार्टी ने उन्हें विवाद का विषय बना दिया है।
पहला मामला अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे से संबंधित है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूबियो की मुलाकात मुंबई में निर्धारित है। राहुल गांधी ने इस पर टिप्पणी की कि अमेरिका के विदेश मंत्री ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस बात को आगे बढ़ाया। क्या यह उचित है कि भारत के विदेश मंत्री किसी अन्य शहर में अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलें और इसे तलब करने के रूप में देखा जाए? राहुल गांधी ने जानबूझकर ऐसा कहा क्योंकि उन्हें पता है कि इससे सरकार को बैकफुट पर आना पड़ेगा।
दूसरा मामला जनगणना के नियमों में बदलाव का है। भारत के महापंजीयक ने अगले साल होने वाली जनगणना में सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और निजी स्कूलों के कर्मचारियों को शामिल करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के लिए रोजगार योजना है। जबकि यह एक सकारात्मक पहल है कि वॉलंटियर्स को प्रशिक्षण देकर इस तरह के कार्यों में लगाया जाए। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी और सरकारी कार्यालयों में कामकाज में बाधा कम होगी।
