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कांग्रेस की डीएमके पर परिसीमन बिल के समर्थन की आशंका

कांग्रेस के नेता मणिक्कम टैगोर ने आशंका जताई है कि डीएमके संसद में परिसीमन बिल का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जिन पार्टियों ने पहले इस बिल का विरोध किया था, वे फिर से ऐसा ही करेंगी। वहीं, टीवीके ने भी स्पष्ट किया है कि वे इस बिल का विरोध करेंगे, हालांकि उनके पास कोई सांसद नहीं है। जानें इस राजनीतिक स्थिति का क्या असर हो सकता है।
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कांग्रेस की चिंताएँ

कांग्रेस को यह विश्वास है कि एमके स्टालिन की पार्टी, डीएमके, संसद में परिसीमन बिल का समर्थन नहीं करेगी। कांग्रेस के नेता मणिक्कम टैगोर ने एक साक्षात्कार में कहा कि जिन दलों ने अप्रैल में संसद की विशेष बैठक में नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के खिलाफ मतदान किया था, वे इस बार भी ऐसा ही करेंगी। उनका इशारा डीएमके की ओर था, जिसने इस बिल का सबसे तीव्र विरोध किया था। एमके स्टालिन ने काले कपड़े पहनकर बिल की प्रति जलाई थी और उनके सांसदों ने संसद में भी काले कपड़े पहनकर चर्चा में भाग लिया था।


टीवीके का स्पष्ट विरोध

मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके से कोई उम्मीद नहीं जताई है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी हर हाल में इस बिल का विरोध करेगी। समस्या यह है कि टीवीके का कोई सांसद वर्तमान में नहीं है। एक राज्यसभा सीट का अवसर पार्टी को मिला था, लेकिन विजय ने वह सीट भी कांग्रेस को दे दी। विजय के इस रुख से यह कहा जा रहा है कि डीएमके पर दबाव बढ़ेगा। उन्हें यह समझ में आ रहा है कि अगर टीवीके ने परिसीमन को द्रविड पहचान और तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति को कमजोर करने के प्रयास से जोड़ा, तो डीएमके को भविष्य में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। टीवीके और कांग्रेस के नेता यह भी कह रहे हैं कि यदि डीएमके ने भाजपा का समर्थन किया, तो उसका एजेंडा पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और उस स्थान पर टीवीके और कांग्रेस आ जाएंगे।