कांग्रेस की राजनीति में बदलाव: सहयोगियों से दूरी और चुनावी रणनीतियाँ
कांग्रेस पार्टी की नई दिशा
कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक गतिविधियाँ अब और भी रोचक होती जा रही हैं। पार्टी ने सहयोगी दलों के प्रति अपनी चिंता को कम कर दिया है और पुरानी सहयोगियों से संबंध तोड़ने में भी संकोच नहीं कर रही है। तमिलनाडु में, उसने डीएमके से तुरंत दूरी बना ली। इसी तरह, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ भी कोई तालमेल नहीं रखा गया है, और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के साथ संबंध लगभग समाप्त हो चुके हैं।
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिसमें राजद ने एकतरफा तरीके से छह सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके जवाब में, कांग्रेस ने भी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की स्थिति
पश्चिम बंगाल में रेजीनगर और नंदीग्राम सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस से संपर्क किया था, लेकिन कांग्रेस ने तालमेल से इनकार कर दिया और दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए। लेफ्ट पार्टियाँ भी इन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं।
कांग्रेस और लेफ्ट दोनों को यह महसूस हो रहा है कि ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर हुई है, जिससे उनका मुस्लिम वोट बैंक टूट सकता है। इस कारण, इन दोनों सीटों पर चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होगा। रेजीनगर में इस्तीफा देने वाले विधायक हुमायूं कबीर भी उम्मीदवार हैं। यदि ममता दोनों सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती हैं, तो उनकी राजनीतिक वापसी की संभावना बढ़ सकती है।
