कांग्रेस की विपक्षी राजनीति: प्रेस कॉन्फ्रेंस से आगे बढ़ने की जरूरत
कांग्रेस की विपक्षी राजनीति का इतिहास
कांग्रेस पार्टी के बारे में पहले यह कहा जाता था कि उसे विपक्ष की राजनीति का अनुभव नहीं है। इसका मुख्य कारण यह था कि पार्टी ने स्वतंत्रता के बाद से अधिकतर समय सत्ता में बिताया। 2014 से पहले, कांग्रेस ने 67 वर्षों में केवल 12 साल विपक्ष में बिताए, जिसमें तीन बार सत्ता से बाहर रही। इन वर्षों में, जब भी कांग्रेस विपक्ष में थी, उसने सत्ता का इंतजार किया।
हालांकि, पिछले 12 वर्षों से कांग्रेस लगातार सत्ता से बाहर है और अधिकांश राज्यों में उसकी स्थिति कमजोर हो गई है। केवल हिमाचल प्रदेश में उसका शासन है, जबकि अन्य राज्यों में वह सत्ता से बाहर है। इसके बावजूद, कांग्रेस ने विपक्ष की राजनीति में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
कांग्रेस को सत्ता पक्ष को जवाबदेह ठहराने, प्रदर्शन करने और जनता में एंटी इन्कम्बैंसी भावना पैदा करने की आवश्यकता है। वर्तमान में, पार्टी की अधिकांश गतिविधियाँ सोशल मीडिया पर ही सीमित हैं।
कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा के दौरान छात्रों की स्थिति भी चिंताजनक रही है। इसी तरह, कांग्रेस ने छात्रों के मुद्दों पर कोई बड़ा आंदोलन नहीं किया है। हाल ही में, नीट यूजी परीक्षा रद्द होने से प्रभावित 23 लाख छात्रों की नाराजगी को लेकर कांग्रेस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
कांग्रेस अब 'छात्रों की गूंज' नामक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने जा रही है, जिसमें 28 नेताओं को अधिकृत किया गया है। यह राजनीति का एक कमजोर रूप है, जो केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने से भी कम प्रभावी है।
