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कांग्रेस ने अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी की निंदा की

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना पर कोई संवेदना नहीं व्यक्त की, जबकि देश शोक में है। श्रीनेत ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने जानबूझकर भारतीय नाविकों को निशाना बनाया। उनका कहना था कि मोदी सरकार की विदेश नीति विफल है और इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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कांग्रेस ने अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी की निंदा की

कांग्रेस प्रवक्ता का बयान

नई दिल्ली। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, मैं हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा, उत्तर प्रदेश के शिवानंद चौरसिया और आंध्र प्रदेश के पटनाला सुरेश को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। इन तीनों बहादुर भारतीय नाविकों की ओमान की खाड़ी में अमेरिका द्वारा निर्मित हमले में हत्या कर दी गई। हम पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और कांग्रेस पार्टी उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आपने जो वीडियो देखा, उसमें शिवानंद चौरसिया की बिलखती मां और रोते हुए पिता को देखा जा सकता है। यही स्थिति अन्य नाविकों के परिवारों की भी है। नाविकों का कहना है कि वहां भारतीयों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि प्रधानमंत्री इस गर्मी से दूर गलबहियां कर रहे हैं और संगीत का आनंद ले रहे हैं।


उन्होंने आगे कहा कि, 11 जून को अमेरिका ने MT Settebello जहाज पर हमला कर तीन भारतीय नाविकों की हत्या की। इस हमले के समय अमेरिका को पता था कि जहाज पर भारतीय नाविक हैं, फिर भी उसने हमला किया। हमारा इस युद्ध से कोई संबंध नहीं है, लेकिन अमेरिका ने हमारे लोगों की हत्या का साहस किया। इन हत्याओं से पूरा देश शोक में है। दिल्ली में ऑटो चलाने वाले भाइयों ने अमेरिका के झंडे वाले पोस्टर फाड़ दिए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों की मौत पर एक शब्द भी नहीं कहा। नरेंद्र मोदी का सैर-सपाटा जारी है। वे फ़्रांस में नाच-गाना देख रहे हैं और उन्हें अपने देश से कोई मतलब नहीं है। इन दर्दनाक मौतों पर नरेंद्र मोदी की चुप्पी और उनकी सरकार का कायराना रवैया देश की विफल विदेश नीति का उदाहरण है। भारतीय ऐसे द्वंद में Collateral damage बन रहे हैं, जिसका हमसे कोई लेना-देना नहीं है। इन भारतीयों को मारने वाला कोई और नहीं बल्कि मोदी का प्रिय मित्र ट्रंप है।


सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि, नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा में ट्रंप से मिलने वाले हैं। जब वे ट्रंप से मिलेंगे तो उनकी केमिस्ट्री का जिक्र होगा, 'My Friend Trump' कहा जाएगा, लेकिन मेरे मन में एक सवाल है कि क्या नरेंद्र मोदी, ट्रंप से हाथ मिलाएंगे? ऐसा इसलिए क्योंकि जब पहलगाम का नरसंहार हुआ था, तब भारत-पाक के मैच को जस्टिफाई करने के लिए भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था। उस समय पाकिस्तान हत्यारा था- आज अमेरिका हत्यारा है।


उन्होंने आगे कहा कि, ट्रंप की सेना ने हमारे लोगों की हत्या कर दी, लेकिन मोदी सरकार ने क्या किया? क्या हमने किसी भी अंतरराष्ट्रीय फोरम में कहा कि इस मामले की जांच हो? क्या हमने सार्वजनिक रूप से कड़े शब्दों में कहा है कि अमेरिका ने गलत किया है? क्या हमने ये कहा कि अमेरिका ने नियमों का उल्लंघन किया है? क्या हमारे देश के लोगों को ये आश्वासन दिया गया है कि ऐसी हत्याएं दोबारा नहीं होंगी?


नरेंद्र मोदी की सरकार ऐसा कुछ भी नहीं कर पाई। बड़ी ही दबी जुबान में किंतु-परंतु करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 जून को अमेरिकी Chargé d'Affaires को तलब किया, जो एक रूटीन डिप्लोमैटिक एक्सरसाइज है। इसके बाद जयशंकर जी ने मीडिया के सामने बयान दिया कि हमने अमेरिका के सामने आपत्ति जताई है और कहा है कि ये हत्याएं जायज नहीं हैं। लेकिन कुछ ही देर बाद अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो का बयान आता है, जिसने नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की बखिया उधेड़ दी और देश को शर्मसार किया।


अपने बयान में अमेरिका ने माफी या शोक व्यक्त करने के बदले हमें ही धमका दिया और हत्याओं को जायज ठहराया। साथ ही कहा कि अगली बार अगर हमारा आदेश नहीं माना तो फिर ऐसा होगा। अब एस. जयशंकर और मार्को रुबियो में कोई एक ही व्यक्ति सच बोल रहा है, जिसमें लगता है कि मार्को रुबियो की बात सच है, क्योंकि अभी तक मोदी सरकार ने उसकी बात का खंडन नहीं किया है। अमेरिका हमारे लोगों को मार देता है और नरेंद्र मोदी कुछ भी नहीं बोलते- जाने मोदी सरकार को अमेरिका से डर क्यों लगता है?