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कांग्रेस नेताओं की स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थिति पर चर्चा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे वर्ष भाग नहीं लिया, जिससे राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गई हैं। इस बार की अनुपस्थिति ऐसे समय में हुई है जब संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा है। जानें इस विवाद के पीछे के कारण और विपक्ष की प्रतिक्रिया।
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स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थिति


नई दिल्ली: कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगातार दूसरे वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग नहीं लिया। 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दोनों नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।


पिछले वर्ष 2025 में भी खरगे और राहुल गांधी ने स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में भाग नहीं लिया था। यह अनुपस्थिति ऐसे समय में आई है जब केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।


अनुपस्थिति का कारण

राहुल गांधी की समारोह में भागीदारी को लेकर 2024 में भी विवाद उत्पन्न हुआ था। उस समय उन्हें लाल किले पर आयोजित समारोह में पीछे की पंक्ति में बैठाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, वह दूसरी आखिरी पंक्ति में थे, जिस पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्ष ने राहुल गांधी के लिए निर्धारित सीट को कांग्रेस और जनता का अपमान बताया। वहीं, समारोह का आयोजन करने वाले रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ओलंपिक पदक विजेताओं को बैठाने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया था। सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को ऐसे महत्वपूर्ण समारोहों में आगे की पंक्ति में स्थान दिया जाता है।


2024 के विवाद के बाद भी राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद जारी रहे हैं। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह से उनकी अनुपस्थिति ऐसे समय में हुई है जब संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला।


संसद का मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त हुआ। इस दौरान सदन की कार्यवाही और उत्पादकता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च से जुड़े घटनाक्रम के बीच हुई थी।


इस मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए, लेकिन विस्तृत चर्चा केवल एक विधेयक पर हुई, जो परीक्षा में पेपर लीक से संबंधित था। कम कार्यवाही और चर्चा को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया।