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कांग्रेस नेताओं ने उज्जैन में जमीन सौदे पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता जीतू पटवारी और पवन खेड़ा ने उज्जैन में 500 करोड़ रुपये की जमीन को 1 रुपये में ट्रस्ट को देने के मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार द्वारा जमीन खरीदने के स्रोतों पर भी सवाल खड़े किए। पटवारी ने कहा कि यह मामला भ्रष्टाचार का प्रतीक है और इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। क्या बीजेपी इस मुद्दे को जाति के सवालों से भटकाने की कोशिश कर रही है? जानें पूरी कहानी में।
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कांग्रेस नेताओं ने उज्जैन में जमीन सौदे पर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठे गंभीर सवाल


नई दिल्ली। कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा और मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा खरीदी गई जमीन के संबंध में गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उज्जैन में 500 करोड़ रुपये की मूल्यवान जमीन एक ट्रस्ट को मात्र 1 रुपये में हस्तांतरित की गई है। इस ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री राम जी हैं, जो मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार हैं।


पटवारी ने सवाल उठाया, "500 करोड़ रुपये की जमीन 1 रुपये में क्यों दी गई? यदि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट गलत है, तो FIR क्यों नहीं दर्ज की गई? जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष से इस जमीन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जाति के मुद्दे पर जवाब दिया। क्या यही इनकी सोच है?" उन्होंने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार द्वारा तेजी से खरीदी गई जमीनों के लिए पैसे कहां से आए? क्या इन जमीनों का पूरा विवरण जनता के सामने नहीं आना चाहिए?




जीतू पटवारी ने आगे कहा, "मुख्यमंत्री मोहन यादव को बताना चाहिए कि उनके परिवार की किन कंपनियों को विकास परियोजनाओं का लाभ मिला है। क्या सरकार संबंधित क्षेत्र के मास्टर प्लान में हुए बदलाव को सार्वजनिक करेगी? क्या इन परियोजनाओं की जानकारी वहां के किसानों को थी, जिनकी पहले से जमीनें हैं? क्या आप इस मामले की न्यायिक जांच की पहल करेंगे?"


उन्होंने यह भी कहा कि मोहन यादव के जमीन घोटाले के मुद्दे को भटकाने के लिए बीजेपी जाति के मुद्दे को उठा रही है। उन्होंने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि वह ऐसी हेडलाइन छाप रही है, जबकि मीडिया को यह बताना चाहिए कि मुख्यमंत्री के OBC होने से भ्रष्टाचार की छूट नहीं मिलती। इसके अलावा, मोहन यादव के परिवार द्वारा की गई रजिस्ट्री में टैक्स चोरी का भी आरोप लगाया गया है। यह केवल शुरुआत है, और धीरे-धीरे और तथ्य सामने आएंगे।