काशी संस्कृति संसद 2026: सनातन धर्म की रक्षा के लिए संतों का एकजुट होना आवश्यक
काशी संस्कृति संसद का उद्घाटन
काशी संस्कृति संसद 2026 : सिगरा में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति संसद के उद्घाटन सत्र में ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए यह आयोजन आवश्यक है। उन्होंने गोमाता की रक्षा के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष रविंद्रपुरी जी महाराज ने कहा कि संत समाज हमेशा धर्म की रक्षा में तत्पर रहा है और आगे भी ऐसा करेगा।
संस्कृति संसद के महत्व पर चर्चा
श्री करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में आंदोलन हुआ
स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृति संसद के संत वक्ताओं के विचारों को अमल में लाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म पर हमले हो रहे हैं, जिससे रक्षा के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है। उन्होंने गो, गंगा, गीता के महत्व को रेखांकित किया और गोमाता की रक्षा के लिए कानून बनाने की अपील की।
संत समाज की एकजुटता
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष रविंद्रपुरी जी महाराज ने कहा कि संत समाज को एकजुट होकर भारतीय संस्कृति की रक्षा में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों ने हमेशा संस्कृति की रक्षा की है और आगे भी ऐसा करेंगे।
समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान
स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती का संदेश
स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि वर्तमान में कई षड्यंत्र चल रहे हैं। उन्होंने संतों से अपील की कि वे संस्कृति और धर्म विरोधी शक्तियों के खिलाफ कार्य करें।
कानूनों में बदलाव की आवश्यकता
विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश जी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने ऐसे कानून बनाए हैं जो हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने इन कानूनों में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
धर्मांतरण की चुनौती
विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक जी ने कहा कि हिंदुओं की संख्या घट रही है और मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या एक असंतुलन पैदा कर रही है। उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
गुरुकुलों की स्थापना की आवश्यकता
कथावाचक आचार्य सुधांशुजी महाराज ने कहा कि हमें अधिक गुरुकुलों की स्थापना करनी चाहिए। उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाएं।
आयोजन का शुभारंभ
आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन सन्त समिति के कोषाध्यक्ष जनार्दन हरि जी ने किया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के लगभग 1500 संतों ने भाग लिया।
