कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा पर गंभीर खतरा, डेटा लीक का मामला
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की सुरक्षा में चूक
भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट, तमिलनाडु में एक गंभीर सुरक्षा मुद्दे का सामना कर रहा है। रैनसमवेयर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' ने डार्क वेब पर इस प्लांट से संबंधित हजारों गोपनीय दस्तावेजों को लीक कर दिया है। इन लीक हुए दस्तावेजों में प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट और आपूर्तिकर्ताओं की विस्तृत जानकारी शामिल है। हैकर्स का दावा है कि यह संवेदनशील जानकारी अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से संबंधित है, जो इस परियोजना के प्रमुख ठेकेदारों में से एक है।
रिलायंस ग्रुप की प्रतिक्रिया
इस मामले पर रिलायंस ग्रुप ने एक बयान जारी कर स्वीकार किया है कि उनके थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर 'योट्टा' द्वारा होस्ट किए गए सर्वर में आंशिक डेटा लीक हुआ है। कंपनी ने तुरंत इस घटना की सूचना भारत सरकार को दे दी है। इस बीच, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। योट्टा ने बताया कि उन्हें मई के अंत में सर्वर पर संदिग्ध गतिविधियों का पता चला था, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई।
संवेदनशील दस्तावेजों का खतरा
हालांकि राहत की बात यह है कि लीक हुए डेटा में परमाणु रिएक्टरों के मुख्य कोर सिस्टम की जानकारी शामिल नहीं है, जो कि रूसी कंपनी रोसाटम द्वारा विकसित किया गया है। लेकिन लीक हुए 19,000 संवेदनशील दस्तावेजों में प्लांट के निर्माणाधीन यूनिट 3 और यूनिट 4 के वेंटिलेशन, कूलिंग सिस्टम और सामान्य नियंत्रण कक्ष के पूरे फ्लोर लेआउट का नक्शा शामिल है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन दस्तावेजों का उपयोग करके असामाजिक तत्व प्लांट के सपोर्ट सिस्टम की कमजोरियों का पता लगा सकते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
भारत में साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ
यह साइबर हमला भारत में कॉर्पोरेट और बुनियादी ढांचे की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रैनसमवेयर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' ने इससे पहले भी टाटा ग्रुप और नाइके जैसी बड़ी कंपनियों को निशाना बनाया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत डेटा लीक के मामलों में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है, और लगभग 57% भारतीय संगठनों में उचित साइबर हाइजीन की कमी है। कुडनकुलम प्लांट पर यह दूसरा साइबर हमला है; इससे पहले 2019 में भी इसके प्रशासनिक नेटवर्क पर विदेशी हैकर्स द्वारा एक मैलवेयर का हमला हुआ था।
