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केंद्र सरकार का नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का प्रयास

केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन बिल को पास कराने की योजना बना रही है। इस प्रक्रिया में डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि स्टालिन अपने सांसदों का समर्थन देते हैं, तो सरकार को सफलता मिल सकती है। लेकिन अगर वे अपने पूर्व के रुख पर कायम रहते हैं, तो सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की रणनीतियाँ और संभावनाएँ।
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केंद्र सरकार की रणनीति


केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन बिल को पास कराने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना और महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देना है, जिसे जनगणना की बाध्यता से मुक्त किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने दो तिहाई बहुमत जुटाने का अभियान तेज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद अब सरकार के साथ हैं, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद भी एनडीए का समर्थन कर रहे हैं। शरद पवार की पार्टी के कम से कम छह सांसदों का समर्थन भी सरकार को मिल सकता है।


हालांकि, असली चुनौती डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन के हाथ में है। यदि स्टालिन की पार्टी के 22 सांसद सरकार का समर्थन करते हैं, तो सरकार सफल हो जाएगी। लेकिन अगर स्टालिन अपने पूर्व के रुख पर कायम रहते हैं और परिसीमन का विरोध करते हैं, तो सरकार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इस समय, सरकार और विपक्ष दोनों स्टालिन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।


जानकार सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों को विश्वास है कि स्टालिन उनके अनुसार कार्य करेंगे। राहुल गांधी का मानना है कि स्टालिन अपने रुख में बदलाव नहीं करेंगे। उन्होंने अप्रैल में इस बिल का विरोध किया था, इसलिए उनके लिए इसे समर्थन देना मुश्किल होगा। राहुल ने पार्टी के संसदीय रणनीतिकारों के साथ बैठक में कहा कि तमिलनाडु की कोई भी पार्टी परिसीमन बिल का समर्थन नहीं कर सकती, अन्यथा वह राज्य की राजनीति में अलग-थलग पड़ जाएगी। हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेता यह भी मानते हैं कि राहुल को उम्मीद पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्टालिन से बातचीत करनी चाहिए। लेकिन इसकी संभावना कम है।