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केंद्र सरकार का मानसून सत्र: पांच नए विधेयक पेश करने की तैयारी

केंद्र सरकार सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पांच नए विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। इनमें आयकर और एमएसएमई सुधार, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन शामिल हैं। इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। जानें इस सत्र में क्या-क्या पेश किया जाएगा और इसके पीछे के उद्देश्य क्या हैं।
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संसद में नए विधेयकों की प्रस्तुति

नई दिल्ली: केंद्र सरकार सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पांच नए विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। इनमें आयकर और एमएसएमई सुधार, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं।


18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में, सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेगी। इन विधेयकों के माध्यम से पहले जारी अध्यादेशों को कानूनी रूप दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 भी सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे।


आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेना है। इसे भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करने, वैश्विक पूंजी निवेश को आकर्षित करने और विभिन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए पेश किया जा रहा है।


पिछले महीने, सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण रुपए पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने हेतु अध्यादेश जारी किया था। इसके तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट दी गई थी।


सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में सहायता करना है।


सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का लक्ष्य एमएसएमई क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना, भुगतान में देरी से जुड़े मामलों के समाधान को सुदृढ़ करना और राज्यों को अधिक अधिकार देना है।


जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत 1969 के मूल कानून में संशोधन कर जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से जुड़े नियमों को अधिक सख्त और सुव्यवस्थित किया जाएगा।


राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य 1971 के कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान या राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करना है।


इसके अलावा, सरकार संसद में पहले से लंबित दो विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाएगी। इनमें विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 शामिल हैं।


विधायी कार्यों के अलावा, सरकार वर्ष 2022-23 के अनुपूरक अनुदानों की मांग भी संसद में चर्चा और मतदान के लिए पेश करेगी।


20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। सत्र के पहले दिन, दोनों सदनों में विपक्षी दलों के नेता संयुक्त रणनीति तय करने के लिए बैठक करेंगे।


मानसून सत्र से पहले, सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है, जिसमें राजनीतिक दलों को सरकार के विधायी एजेंडे और सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों की जानकारी दी जाएगी।