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केंद्र सरकार लोकसभा सीटों में वृद्धि के लिए डीएमके से बातचीत करेगी

केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए प्रयास कर रही है, जिसमें डीएमके से बातचीत की जाएगी। जानें कि कैसे जनगणना के आंकड़े सीटों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और इस प्रक्रिया से तमिलनाडु को क्या नुकसान हो सकता है। सरकार का फॉर्मूला क्या है और विपक्ष की स्थिति क्या है, यह सब जानने के लिए पढ़ें।
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केंद्र सरकार लोकसभा सीटों में वृद्धि के लिए डीएमके से बातचीत करेगी

लोकसभा और विधानसभा सीटों में वृद्धि का प्रयास

केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रही है। इसके लिए दक्षिण भारत की राजनीतिक पार्टियों, विशेषकर डीएमके, से संवाद स्थापित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यदि वर्तमान स्थिति को बनाए रखा गया और संविधान के अनुसार कार्य किया गया, तो तमिलनाडु को नुकसान उठाना पड़ सकता है। संविधान के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इस प्रावधान के तहत, जनसंख्या को आधार बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि जनगणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है और 2028 में इसके परिणाम सामने आएंगे। इन आंकड़ों के अनुसार, सीटों का निर्धारण किया जाएगा, जिससे तमिलनाडु की सीटों में मामूली वृद्धि होगी, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में सीटों की संख्या में काफी वृद्धि होगी।


डीएमके को समझाने का प्रयास

इस संदर्भ में, सरकार डीएमके को यह समझाने का प्रयास करेगी कि वह केंद्र सरकार के फॉर्मूले को स्वीकार कर ले, जिसमें आनुपातिक आधार पर सीटों की वृद्धि का प्रावधान है। इस फॉर्मूले के अनुसार, हर राज्य में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी, जिससे हर राज्य का मौजूदा प्रतिनिधित्व बना रहेगा। इसके अनुसार, तमिलनाडु की 39 सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी, कर्नाटक की 25 से 38 और केरल की 20 से 30 सीटें हो जाएंगी। कुल मिलाकर, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी। हालांकि, इस फॉर्मूले के अनुसार भी उत्तर भारत के राज्यों में सीटों की संख्या अधिक बढ़ेगी।


1971 की जनगणना का आधार

वर्तमान में, लोकसभा की सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर निर्धारित है, जबकि राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या 2001 की जनगणना पर आधारित है। सरकार का कहना है कि वह विधानसभा की सीटों के निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना का उपयोग करेगी, लेकिन लोकसभा की सीटों में बदलाव के लिए 2011 की जनगणना लागू नहीं होगी। इसका मतलब है कि 1971 की जनगणना को आधार बनाकर लोकसभा की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।


विपक्ष की स्थिति

पिछली बार, सरकार ने अप्रैल में तीन दिन का विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का बिल पेश किया था, जो विपक्ष की एकजुटता के कारण गिर गया था। लेकिन अब विपक्ष बिखरा हुआ है और सरकार को तृणमूल कांग्रेस के 20 से अधिक लोकसभा सांसदों का समर्थन मिल गया है। यदि इस बार डीएमके का समर्थन भी मिल जाता है, तो सरकार बिल पास कराने में सफल हो सकती है। 2029 में चुनाव होंगे, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।