Newzfatafatlogo

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्रों के आंदोलन पर उठे सवाल

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस निर्णय का कारण बताया कि वह नहीं चाहते थे कि राष्ट्रविरोधी ताकतें छात्रों के मुद्दे का लाभ उठाएं। प्रधान का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है, जिसमें उन्होंने 1997 में ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया था। उनके इस्तीफे के बाद, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपने चार दशकों के योगदान का जिक्र किया और छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी।
 | 

नई दिल्ली में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा


नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 50 दिनों तक चले छात्र आंदोलन और NEET पेपर लीक विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि छात्रों के मुद्दे पर चल रहे आंदोलन का लाभ राष्ट्रविरोधी ताकतें न उठा सकें और भ्रम फैलाने की कोशिशों को रोका जा सके।


शिक्षा मंत्री के रूप में दो बार की जिम्मेदारी

धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। संगठनात्मक कौशल और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार में पेट्रोलियम, कौशल विकास और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। उन्हें पहली बार 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया था और 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें फिर से इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।


राजनीतिक सफर की दिलचस्प कहानी

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उस पेपर लीक विवाद से जुड़ा है, जिसने उनके राजनीतिक जीवन की दिशा तय की थी। 1997 में ओडिशा में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे। उनके नेतृत्व में छात्रों ने भुवनेश्वर में राज्य सचिवालय का घेराव किया, जहां पुलिस लाठीचार्ज में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस आंदोलन के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होकर पार्टी के प्रमुख नेताओं में अपनी जगह बनाई।


शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चार दशकों का योगदान

अपने इस्तीफे के बाद प्रधान ने कहा कि उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए काम किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में सेवा करना उनके लिए गर्व की बात रही। उन्होंने NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो।


धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के युवाओं का भविष्य है, और भारत की युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है।