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केदारनाथ यात्रा फिर से शुरू, सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं की भीड़

उत्तराखंड में केदारनाथ यात्रा तीन दिन बाद पुनः शुरू हो गई है, जिससे सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। बारिश और अवरुद्ध मार्ग के कारण यात्रा रुकी हुई थी, लेकिन जैसे ही मार्ग खुला, भक्तों ने धाम की ओर प्रस्थान किया। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। जानें इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की स्थिति और प्रशासन की तैयारियों के बारे में।
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केदारनाथ यात्रा का पुनः आरंभ

उत्तराखंड: लगातार तीन दिनों की बारिश और अवरुद्ध पैदल मार्ग के कारण बाबा केदार की यात्रा रुकी हुई थी। हजारों श्रद्धालु सोनप्रयाग में ठहरे हुए थे, सभी की नजरें यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रही थीं। मंगलवार को चौथे दिन जैसे ही केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर आवाजाही शुरू हुई, सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र भक्तों से भर गया और बाबा केदार के जयकारों से गूंज उठा।

कंधों पर सामान लादे, जुबां पर ‘बम-बम भोले’ का जाप करते हुए हजारों श्रद्धालु धाम की ओर बढ़ने लगे। तीन दिनों से रुकी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने यात्रियों को एक साथ आगे बढ़ाने के बजाय जत्थों में और चरणबद्ध तरीके से रवाना किया। इसके बावजूद सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव साफ दिखाई दिया। जगह-जगह लंबी कतारें लगी रहीं। यात्रा के फिर से शुरू होते ही सोनप्रयाग से केदारनाथ तक ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष गूंजने लगे। बारिश और कठिनाइयों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। राह कठिन थी, लेकिन बाबा केदार के दर्शन की आस लिए श्रद्धालुओं के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि केदारनाथ पैदल मार्ग अभी भी खतरनाक बना हुआ है। ऐसे में यात्रियों की आवाजाही को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालुओं को आगे भेजा जा रहा है, ताकि जोखिम को कम किया जा सके।

इस बीच, पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पर रोक के कारण गौरीकुंड में संचालकों का आक्रोश सामने आया है। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा शुरू होने के बावजूद घोड़े-खच्चरों को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर संचालक नाराज हैं। उनका कहना है कि इससे उनके सामने रोजी-रोटी और संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। तीन दिन की बंदी के बाद खुली राह ने जहां श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी लौटा दी, वहीं खतरनाक बने पैदल मार्ग और बढ़ती भीड़ ने प्रशासन के सामने सुरक्षा की चुनौती भी खड़ी कर दी है.