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केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के 'स्वाभिमान-शून्य' बयान का करारा जवाब दिया है। मौर्य ने कहा कि स्वाभिमान की सही परिभाषा सत्ता से नहीं, बल्कि विचारों और जनसेवा से तय होती है। उन्होंने परिवारवादी राजनीति पर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता संघर्ष के बाद ही आगे बढ़ते हैं। मौर्य ने यह भी कहा कि 2027 में जनता सपा को प्रदेश से बाहर करेगी। इस बहस में मौर्य के बयान और उनके विचारों की गहराई को जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
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यूपी की राजनीति में गरमाई बहस


यूपी की राजनीति: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के 'स्वाभिमान-शून्य' बयान का जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वाभिमान की सही परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से निर्धारित होती है। इससे पहले, मौर्य ने अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अहंकारी करार दिया था। इस पर अखिलेश ने पलटवार करते हुए मौर्य को 'स्वाभिमान शून्य' बताया और कहा कि उनका कई बार अपमान हुआ है, फिर भी वह भाजपा के साथ बने हुए हैं।


सोशल मीडिया पर बुधवार को मौर्य ने कहा, "अखिलेश जी, स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है। परिवार की मर्यादा सबसे पहली पाठशाला होती है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने इसे अपने परिवार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में पूरी निष्ठा से निभाया है। लेकिन आपका 'पारिवारिक शिष्टाचार' सबको पता है। भाजपा का हर कार्यकर्ता संघर्ष की भट्ठी में तपता है, वह किसी राजनीतिक खानदान की विरासत का मोहताज नहीं होता। उसके लिए पद अस्थायी है, लेकिन जनसेवा का संकल्प स्थायी है। परिवारवादी राजनीति के 'नुमाइंदों' की सोच अपने 'कुनबे की चौखट' तक सीमित होती है। उनकी राजनीति कुनबे से शुरू होकर वहीं खत्म हो जाती है।"


अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मौर्य ने कहा, "आपको कुर्सी की इतनी चिंता इसलिए है क्योंकि 2017 में सत्ता हाथ से फिसल गई थी, और यह टीस आपके दिलो-दिमाग पर आज भी छाई हुई है। यह टीस 2047 तक बनी रहेगी, क्योंकि जो लोग अपने कुशासन के कारण इतिहास के पन्नों में 'पूर्व' हो चुके हैं, वे हमेशा 'पूर्व' रहेंगे। हम सुशासन और विकास के संकल्प के साथ 2027 में 2017 को दोहराएंगे और उत्तर प्रदेश में फिर से कमल खिलाएंगे। इसलिए स्वाभिमान की दुहाई मत दीजिए, क्योंकि 2027 में जनता सपा को प्रदेश से बाहर करेगी!"