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केशव मौर्य ने कांग्रेस पर साधा निशाना, वंदे मातरम् के मुद्दे पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश अब तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति से आगे बढ़ चुका है। उन्होंने वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस के निर्णय की आलोचना की और सवाल उठाया कि पार्टी धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख क्यों नहीं कर रही है। मौर्य ने यह भी कहा कि राष्ट्रगीत को अधूरा रखने की जिद कांग्रेस को जनभावनाओं से दूर कर रही है।
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कांग्रेस की राजनीति पर केशव मौर्य का हमला


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि देश अब तुष्टिकरण और वोटबैंक की संकीर्ण राजनीति से आगे बढ़ चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम्' पूरे देश में अपने सभी छह छंदों के साथ गूंजेगा, और इसकी गूंज गांधी परिवार से लेकर कांग्रेस के मुख्यालय तक सुनाई देगी।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौर्य ने लिखा, 'रस्सी जल गई, पर ऐंठन नहीं गई।' उन्होंने कांग्रेस के निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गांधी परिवार और उनकी पार्टी आज भी उसी स्थिति में हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 'वंदे मातरम्' के केवल दो छंद गाने के अपने 90 साल पुराने निर्णय को फिर से स्वीकार किया है। कट्टरपंथियों के दबाव में राष्ट्रगीत को अधूरा रखने की यह जिद कांग्रेस को जनभावनाओं से दूर कर रही है।


उन्होंने आगे कहा कि गांधी परिवार के इशारों पर चलने वाली कांग्रेस का यह निर्णय किसी वैचारिक सिद्धांत से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह वोटबैंक और तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम है। धर्म के आधार पर की गई राजनीति की भयानक कीमत देश ने विभाजन के रूप में चुकाई है, लेकिन कांग्रेस आज भी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक को धार्मिक वोटों के तराजू पर तौल रही है।


मौर्य ने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के उल्लेख से क्यों परहेज कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि वह किसे खुश करने के लिए राष्ट्रगीत के चार छंदों को छोड़ने पर अड़ी है। यह जिद 'एक्सीडेंटल हिंदू' वाली मानसिकता और छद्म धर्मनिरपेक्षता का असली चेहरा उजागर करती है।


केशव मौर्य ने फिर से दोहराया कि देश अब तुष्टिकरण और वोटबैंक की संकीर्ण राजनीति से बहुत आगे बढ़ चुका है। 'वंदे मातरम्' अपने सभी छह छंदों के साथ गूंजेगा, और इसकी ध्वनि गांधी परिवार से लेकर कांग्रेस मुख्यालय तक सुनाई देगी।