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क्या Malviya Nagar अग्निकांड में अधिकारियों को बचाने की साजिश हो रही है?

मालवीय नगर में हुए अग्निकांड के बाद अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्या होटल मालिक को बचाने की साजिश चल रही है? जांच रिपोर्ट में देरी और लाइसेंस उल्लंघनों के मामले में गंभीर चिंताएं हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी और क्या हो रहा है पीछे।
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क्या Malviya Nagar अग्निकांड में अधिकारियों को बचाने की साजिश हो रही है?

नई दिल्ली में अग्निकांड की जांच पर सवाल


नई दिल्ली: क्या मालवीय नगर में हुए अग्निकांड के बाद अधिकारियों को बचाने की कोशिशें चल रही हैं? इस गंभीर घटना के बाद होटल के मालिक को क्लीन चिट देने की कोई योजना तो नहीं बनाई जा रही? यदि ऐसा नहीं है, तो जांच रिपोर्ट तीन दिन में आने के बावजूद सात दिन बाद भी क्यों नहीं आई? मालवीय नगर अग्निकांड की जांच रिपोर्ट तीन दिन में पेश की जानी थी, लेकिन अब तक एमसीडी अधिकारियों के पास कोई जानकारी नहीं है। इस मामले में पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 3 जून की सुबह होटल में आग ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई। ग्राउंड फ्लोर पर आग बुझाने के लिए रखे गए फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर्ड थे। होटल को दो प्रकार के लाइसेंस प्राप्त थे। दिल्ली सरकार से 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' का लाइसेंस और दूसरा एमसीडी के पब्लिक हेल्थ विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से। होटल ने दोनों लाइसेंस का उल्लंघन किया। 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' के लाइसेंस के तहत केवल छह कमरे बनाने की अनुमति थी, जबकि होटल में लगभग 25 कमरे थे।


बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन

इसके अलावा, एमसीडी से टी एंड स्नैक्स का लाइसेंस लिया गया था, लेकिन होटल के ग्राउंड फ्लोर पर एक रेस्टोरेंट चल रहा था। होटल मालिक की यह लापरवाही वहां रहने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हुई। यह जानकर आश्चर्य होता है कि होटल मालिक पिछले कई वर्षों से लाइसेंस नियमों और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर रहा था, लेकिन एमसीडी और दिल्ली सरकार के किसी भी विभाग ने इसकी जांच नहीं की। इसके अलावा, होटल का 'टी एंड स्नैक्स' का लाइसेंस मार्च में समाप्त हो गया था। जिस दिन होटल में आग लगी, उसी दिन यह लाइसेंस फिर से लिया गया था, जिसे उसी शाम रद्द कर दिया गया।


जांच रिपोर्ट में देरी

इस हादसे के बाद मेयर प्रवेक्ष वाही ने तीन दिन में एमसीडी अधिकारियों से जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। इस कारण इस हादसे के लिए जिम्मेदार पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में आनन-फानन में एक रिपोर्ट तैयार कर एमसीडी के सीनियर अधिकारियों को भेजी गई थी। अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को एमसीडी कमिश्नर ऑफिस में भेजा, जहां कई खामियां पाई गईं। इसके बाद एमसीडी कमिश्नर ने डिटेल रिपोर्ट फिर से तैयार करने का आदेश दिया, लेकिन अब तक रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है।