क्या ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा होगा? CIP का बड़ा आंदोलन मुंबई में
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर सियासी हलचल
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CIP) ने 2 अक्टूबर को मुंबई में एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन करने का निर्णय लिया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। CIP के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने कहा कि जब वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए लोगों की अनुमति नहीं ली गई, तो सरकार प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगने की उम्मीद कैसे कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली
CIP ने मुंबई के दादर में स्थित शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी CEC के इस्तीफे की मांग को दोहराया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देश के अन्य हिस्सों में भी फैलाया जाएगा। हालांकि, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, और इसके लिए हाईकोर्ट के पुराने आदेशों और शिवाजी पार्क में सभाओं के लिए लागू नियमों का हवाला दिया है।
सरकार को दी चेतावनी: 'जेल में डाल दो, आंदोलन नहीं रुकेगा'
अभिजीत दीपके ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें तीन दिन नहीं, बल्कि तीन महीने के लिए जेल में डाल दे, तो भी उनका प्रदर्शन नहीं रुकेगा। यह बयान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के जवाब में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर तीन दिन तक जमानत नहीं मिलेगी।
इससे पहले, 24 सितंबर को CIP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि अगर इस्तीफा नहीं दिया गया, तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा।
अभिजीत दीपके के गंभीर आरोप
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि SIR के माध्यम से देश में 13 करोड़ से अधिक वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है। दीपके ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार का चुनाव करे, लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार CEC बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं।
