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क्या पासपोर्ट है भारतीय नागरिकता का प्रमाण? जानें विदेश मंत्रालय की राय

भारतीय पासपोर्ट को अक्सर नागरिकता का प्रमाण माना जाता है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इसका मुख्य उद्देश्य यात्रा दस्तावेज के रूप में कार्य करना है। मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में पहचान की जांच की जाती है, लेकिन नागरिकता के कानूनी प्रावधान अलग होते हैं। इस लेख में जानें पासपोर्ट सेवाओं का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधाएं और नागरिकता के कानूनी पहलू। क्या पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण है? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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क्या पासपोर्ट है भारतीय नागरिकता का प्रमाण? जानें विदेश मंत्रालय की राय

पासपोर्ट का असली उद्देश्य क्या है?


नई दिल्ली: भारतीय पासपोर्ट को अक्सर नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण माना जाता है, लेकिन विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य यात्रा दस्तावेज के रूप में कार्य करना है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर पहचान और अन्य जानकारियों की जांच की जाती है, लेकिन नागरिकता से संबंधित कानूनी प्रावधान अलग होते हैं।


पासपोर्ट सेवाओं का विस्तार

अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2025 में देशभर में लगभग 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें से लगभग 1.39 करोड़ पासपोर्ट जारी करने से संबंधित थीं। सामान्य परिस्थितियों में, पासपोर्ट जारी होने में लगभग छह कार्यदिवस लगते हैं, जबकि पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) में आवेदकों की प्रक्रिया 45 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है।


विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में देश में 545 पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं, जबकि एक दशक पहले इनकी संख्या केवल 77 थी। मंत्रालय ने बताया कि पिछले वर्ष 10 नए डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए थे और इस वर्ष 10 और केंद्र खोलने की योजना है।


अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधाएं

मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े भी साझा किए। वर्तमान में, 27 देश भारतीय नागरिकों को वीजा-मुक्त प्रवेश की अनुमति देते हैं, जबकि 47 देशों में भारतीय यात्रियों को 'वीजा ऑन अराइवल' की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, 66 देश भारतीय पासपोर्ट धारकों को ई-वीजा प्रदान करते हैं। मंत्रालय का कहना है कि विभिन्न देशों के साथ किए गए मोबिलिटी समझौतों से छात्रों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और व्यापारियों की आवाजाही को सरल बनाया जा रहा है।


नागरिकता के कानूनी पहलू

हालांकि, नागरिकता के मुद्दे पर कानून अलग दृष्टिकोण अपनाता है। भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार, 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति केवल जन्म के आधार पर स्वतः भारतीय नागरिक नहीं माना जाएगा। इसके लिए आवश्यक है कि उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो।


कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकता साबित करने के मामलों में केवल पासपोर्ट, आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र पर्याप्त नहीं होते। ऐसे मामलों में माता-पिता की नागरिकता और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाती है। इसलिए, पासपोर्ट को यात्रा का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा सकता है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम और एकमात्र प्रमाण नहीं है।