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क्या पीएम मोदी का पॉकेट स्क्वायर तिरंगे से था प्रेरित? कांग्रेस और बीजेपी में छिड़ी बहस

15 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी के तिरंगे रंग के पॉकेट स्क्वायर ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद को जन्म दिया। कांग्रेस ने इसे आयरलैंड के झंडे से मिलाने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने इसे सही क्रम में बताया। पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में 'विकसित भारत' का रोडमैप पेश किया गया, लेकिन 'दिमागी नक्सलियों' पर टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया। जानें इस राजनीतिक बहस के पीछे की पूरी कहानी।
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नई दिल्ली में पीएम मोदी का पहनावा चर्चा का विषय


नई दिल्ली: 15 अगस्त को लाल किले पर पीएम नरेंद्र मोदी के पहनावे ने एक बार फिर से सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस बार चर्चा का केंद्र उनकी पॉकेट स्क्वायर बना, जो तिरंगे के रंगों में था। इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बहस छिड़ गई।


कांग्रेस ने उठाए सवाल!

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "क्या साहब ने उर्दू में तिरंगा पहना है? या फिर आयरलैंड का स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं?" उनका इशारा रंगों के क्रम की ओर था, क्योंकि उर्दू दाएं से बाएं लिखी जाती है।


इसके बाद, कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "यह तिरंगे का कैसा स्टाइल है? यह उल्टा है और आयरलैंड के झंडे से ज्यादा मिलता-जुलता है।" श्रीनेत के अनुसार, पॉकेट स्क्वायर में केसरिया-सफेद-हरे का क्रम तिरंगे जैसा नहीं था।


बीजेपी और सोशल मीडिया का जवाब

कांग्रेस की टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने कहा कि पीएम मोदी ने झंडा नहीं पहना था और पॉकेट स्क्वायर में अशोक चक्र भी नहीं था, इसलिए इसे झंडे से जोड़ना गलत है।


बीजेपी कार्यकर्ता संतोष परमार ने लिखा, "यह झंडा नहीं है, बल्कि तीन तह वाला पॉकेट स्क्वायर है। सबसे आगे केसरिया, फिर सफेद और अंत में हरा है। क्रम सही है।"


कुछ लोगों ने फ्लैग कोड का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि जब तिरंगे को वर्टिकली लगाया जाता है, तो केसरिया पट्टी दाईं ओर होनी चाहिए। देखने वाले को यह बाईं तरफ दिखती है।


15 अगस्त को पीएम ने क्या पहना और क्या कहा?

इस बार पीएम मोदी ने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ भूरे रंग की जैकेट पहनी थी और सिर पर राजस्थान-गुजरात की प्रसिद्ध 'बांधेज' कला वाली लाल टाई-एंड-डाई पगड़ी थी। यह उनका लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस भाषण था।


करीब 75 मिनट के भाषण में उन्होंने 2047 तक 'विकसित भारत' के लिए 7 सूत्रीय रोडमैप 'सप्तधारा' पेश किया। पीएम ने Gen-Z को भी साधा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देने का ऐलान किया।


हालांकि, भाषण में 'दिमागी नक्सलियों' पर उनकी टिप्पणी से नया विवाद खड़ा हो गया, जिसे कांग्रेस ने "हताशा का साफ संकेत" बताया। पिछले कुछ वर्षों से स्वतंत्रता दिवस पर पीएम की पगड़ियां और अब पॉकेट स्क्वायर चर्चा का विषय बनते रहे हैं। इस बार तिरंगे को लेकर शुरू हुई बहस ने सियासत को और गरमा दिया।