क्या पीएम मोदी ने शी जिनपिंग की तबीयत को लेकर जताई चिंता? जानें पूरी कहानी
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में खास पल
नई दिल्ली: हाल ही में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक दिलचस्प घटना घटी। सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र में पीएम मोदी अपने भाषण के दौरान शी जिनपिंग की ओर देखते हैं, जो कुछ असहज नजर आ रहे थे। इस स्थिति को भांपते हुए, पीएम मोदी ने तुरंत अपना भाषण रोक दिया।
तबीयत के बारे में पूछताछ
वीडियो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी ने शी जिनपिंग के साथ मौजूद अनुवादक से पूछा, "क्या वह ठीक हैं?" कुछ समय बाद, उन्होंने फिर से उनकी तबीयत के बारे में जानकारी मांगी। हालांकि, शी जिनपिंग की असहजता का कारण तुरंत स्पष्ट नहीं हुआ। कुछ क्षण बाद, चीनी राष्ट्रपति ने सिर हिलाकर उत्तर दिया, जिसके बाद पीएम मोदी ने अपना भाषण फिर से शुरू किया।
यह घटना पीएम मोदी के प्रारंभिक भाषण के लगभग 4 मिनट 40 सेकंड से 5 मिनट 11 सेकंड के बीच हुई। भले ही यह एक संक्षिप्त क्षण था, लेकिन इसने दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान काफी ध्यान आकर्षित किया।
गाला डिनर में अनुपस्थिति
शी जिनपिंग की असहजता के कारणों पर चीन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। दिलचस्प बात यह है कि वह पीएम मोदी द्वारा आयोजित गाला डिनर में भी शामिल नहीं हुए। हालांकि, इससे पहले उन्होंने पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।
डिनर में उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई अटकलें लगाई गईं, लेकिन भारत या चीन की ओर से कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। एक सूत्र के अनुसार, दिनभर की व्यस्तता के कारण शी जिनपिंग थक गए थे और आराम करने के लिए होटल लौट गए। शनिवार को उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त था, जिसमें सुबह चीन से प्रस्थान और दोपहर में दिल्ली पहुंचना शामिल था।
पिछली मुलाकात का संदर्भ
समिट से पहले, पीएम मोदी ने भारत मंडपम में शी जिनपिंग का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने रामनाथस्वामी मंदिर के 1,212 स्तंभों वाले गलियारे के सामने हाथ मिलाया। इसके बाद, पीएम मोदी ने उन्हें इस गलियारे की विशेषताओं और वास्तुकला के बारे में जानकारी दी।
भारत में दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्टूबर 2019 में तमिलनाडु में हुई थी। 2020 में गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि, 2024 के बाद से भारत और चीन के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयास तेज हुए हैं। दोनों देशों ने सीधी उड़ानें फिर से शुरू की हैं और भारत ने चीनी निवेश से संबंधित कुछ नियमों में भी ढील दी है।
