क्या राहुल गांधी का समय आ गया है? विपक्ष की चुनावी तैयारियों पर सवाल
विपक्ष की चुनावी स्थिति
वास्तविकता यह है कि देश में न तो कोई स्पष्ट सत्ता विरोधी लहर है और न ही विपक्ष भाजपा के खिलाफ चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का प्रयास है कि ऐसा माहौल बनाया जाए जैसे चुनाव आयोग भाजपा को जीत दिला रहा हो, जो कि वास्तविकता से बहुत दूर है।
राहुल गांधी को लगता है कि उनका समय आ गया है, और यह सोचने में कोई बुराई नहीं है। विपक्ष में रहकर ऐसा महसूस करना स्वाभाविक है, लेकिन केवल सोचने से कुछ नहीं होता। कांग्रेस के बारे में कहा जाता है कि वह सत्ता में रहती है या सत्ता के इंतजार में। वर्तमान में, राहुल गांधी सत्ता के इंतजार में हैं, और जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है। हर छोटी-बड़ी घटना पर वे मानने लगते हैं कि सरकार कमजोर हो गई है और उनका समय आ गया है। हाल ही में चुनाव आयोग पर एक रिपोर्ट के प्रकाशन ने उन्हें और अन्य विपक्षी दलों को एक बड़ा अवसर समझा।
ममता बनर्जी ने भी इस मौके का लाभ उठाने की कोशिश की और सीपीएम के महासचिव एमए बेबी से संपर्क किया, ताकि विपक्षी दलों को एकजुट किया जा सके। राहुल गांधी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस तरह से बात की जैसे उनकी सरकार आ गई हो। लेकिन उनके उत्साह का कोई ठोस आधार नहीं है। ममता बनर्जी और राहुल गांधी दोनों अपने-अपने कारणों से मौजूदा हालात का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, वास्तविकता यह है कि न तो देश में कोई प्रत्यक्ष सत्ता विरोधी लहर है और न ही विपक्ष भाजपा के साथ जमीनी चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जनता के बीच यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव आयोग भाजपा को जीत दिला रहा है, जो कि सच नहीं है। चुनाव जनता के वोट से जीते जाते हैं।
किसी भी पार्टी के चुनाव जीतने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती है: एक मजबूत संगठन, करिश्माई नेतृत्व, और एक प्रभावी नैरेटिव। वर्तमान में, ये तीनों चीजें भाजपा के पास हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी संगठन की है।
राहुल गांधी का हमलावर होना इस बात का संकेत है कि वे घटनाक्रम को गलत तरीके से देख रहे हैं। वे नेता प्रतिपक्ष हैं और सरकार के खिलाफ बोलना उनका काम है, लेकिन दुर्भाग्य से वे संवैधानिक संस्थाओं का विरोध करने लगे हैं।
बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) जरूरी है? इसका स्पष्ट उत्तर है हां। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह मतदाता सूची की पवित्रता सुनिश्चित करे। अगर इसमें कोई त्रुटि है, तो उस पर सवाल उठाना समझ में आता है, लेकिन यह कहना कि एसआईआर के कारण भाजपा जीत रही है, एक बचकानी बात है।
राहुल गांधी को चाहिए कि वे पार्टी संगठन को मजबूत करें और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहें। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनावी माहौल बनाना और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
