क्या है भारत और रूस के बीच बढ़ते संबंधों का राज? जानें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की खास बातें
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीति
नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीति का एक अनूठा और आत्मीय रूप देखने को मिला। सम्मेलन में शामिल होने आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद गर्मजोशी से किया। इस मुलाकात की चर्चा उस समय तेज हुई जब दोनों वैश्विक नेता औपचारिक बातचीत के बाद बिना किसी प्रोटोकॉल का पालन किए एक ही कार में सवार होकर आगे बढ़ गए। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाती है।
कूटनीतिक संदेश और 'ऑरस सेनाट'
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक अत्यधिक सुरक्षित बख्तरबंद 'ऑरस सेनाट लिमोजिन' में साथ बैठे दिखाई दिए। इस बुलेटप्रूफ गाड़ी में यात्रा करना दोनों देशों के बीच विश्वास का प्रतीक है। यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेता इस तरह साथ दिखे हैं; इससे पहले भी शंघाई सहयोग संगठन के दौरान उन्होंने इसी कार में यात्रा की थी।
भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंध
रूस हमेशा से भारत का एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। विशेष रूप से सैन्य आपूर्ति, उन्नत रक्षा तकनीकों और ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी है। दिसंबर 2025 में भारत दौरे और हाल की किर्गिस्तान में हुई मुलाकातों के बाद नई दिल्ली की यह बैठक यह दर्शाती है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत और रूस की दोस्ती कितनी स्थिर है। मोदी और पुतिन का एक ही गाड़ी में सफर इस बात का प्रमाण है कि भारत की विदेश नीति केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत संबंधों और गहरे विश्वास पर आधारित है।
45 मिनट की महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीति का एक विशेष रूप देखने को मिला। पीएम मोदी और पुतिन ने एक-दूसरे को गले लगाकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच लगभग 45 मिनट तक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आपसी व्यापार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करती है।
