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ग्रेटर नोएडा में PNB घोटाला: करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा

ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला कर्मचारी ने अपने सीनियर्स के पासवर्ड का दुरुपयोग कर ग्राहकों के खातों में सेंधमारी की। इस धोखाधड़ी में लगभग 10.24 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। सीबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और अब तक 37 से अधिक पीड़ित ग्राहकों ने शिकायत दर्ज कराई है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
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PNB में करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला

ग्रेटर नोएडा: पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों रुपये के घोटाले का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक की एक महिला कर्मचारी ने अपने सीनियर अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए तीन वर्षों तक ग्राहकों के खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में सेंधमारी की, जिससे हर कोई हैरान है।

इस हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी में ग्राहकों की मेहनत की कमाई से लगभग 10.24 करोड़ रुपये की ठगी की गई है, जिसके बाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद यूनिट ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 16 सितंबर को संगीता नाम की एक ग्राहक बैंक में अपनी पासबुक अपडेट कराने आईं। उन्होंने देखा कि उनके खाते से तीन अनजान ट्रांजैक्शन हुए हैं। जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो आरोपी महिला कर्मचारी दीपांशी ने इसे तकनीकी समस्या बताकर टालने की कोशिश की, लेकिन बैंक प्रबंधन ने वाउचर और लिखित अनुमति के दस्तावेजों की जांच की, तो कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

पूछताछ में दीपांशी ने जो स्वीकार किया, उसने बैंक अधिकारियों को चौंका दिया। उसने बताया कि उसने अपने साथी अशुतोष पाठक के कहने पर ग्राहकों के पैसे को अन्य खातों में ट्रांसफर किया और सबूत मिटाने के लिए वाउचर भी नष्ट कर दिए।

सीबीआई और पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि दीपांशी ने सीनियर ब्रांच मैनेजर निशा तिर्की सहित 6 बैंक अधिकारियों की सीबीएस यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया। इस धोखाधड़ी को इतनी चतुराई से अंजाम दिया गया कि ग्राहकों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसके लिए आरोपी ने कई खाताधारकों के मोबाइल अलर्ट बंद कर दिए, ताकि पैसे निकलने पर कोई सूचना न मिले। गबन की गई राशि अशुतोष पाठक के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी जैसे लोगों के खातों में ट्रांसफर की जा रही थी।

गबन केवल सेविंग्स अकाउंट्स तक सीमित नहीं रहा। जालसाजों ने ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट पर भी हमला किया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी तरीके से ज्वॉइंट अकाउंट होल्डर जोड़कर समय से पहले एफडी तुड़वाई गईं और पैसे फर्जी खातों में भेज दिए गए। बैंक रिकॉर्ड में 49 एफडी और लगभग 70 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दर्ज है, जिसकी कड़ियों को जोड़ने में एजेंसियां जुटी हैं।

नोएडा पुलिस को अब तक 37 से अधिक पीड़ित ग्राहकों ने लिखित शिकायत दी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडेय की शिकायत पर सीबीआई ने दीपांशी, अशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस, आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। डीएसपी डॉ. जाहिर अख्तर के नेतृत्व में सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि इस धोखाधड़ी की जड़ें और कहां-कहां फैली हैं?