चरणजीत सिंह चन्नी का कांग्रेस पर दबाव, पार्टी में असमंजस की स्थिति
चन्नी का नेतृत्व पर जोर
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस आलाकमान को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है। उनका आग्रह है कि पार्टी उन्हें या तो प्रदेश अध्यक्ष बनाए या मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत करे। हालांकि, कांग्रेस इस पर सहमत नहीं है, क्योंकि उसे जाट सिख और दलित दोनों समुदायों के वोटों की आवश्यकता है। पंजाब कांग्रेस की परंपरा रही है कि चुनाव जीतने पर प्रदेश अध्यक्ष को ही मुख्यमंत्री बनाया जाता है। इस सदी में कांग्रेस को दो बार सरकार बनाने का अवसर मिला, और दोनों बार कैप्टेन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने।
पिछले चुनाव से पहले, कांग्रेस ने कैप्टेन को हटाकर चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू उस समय प्रदेश अध्यक्ष थे। चन्नी को यह चिंता थी कि यदि सिद्धू की अगुवाई में चुनाव होते हैं और कांग्रेस जीतती है, तो सिद्धू को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
इसलिए, चन्नी ने मुख्यमंत्री रहते हुए आलाकमान पर दबाव डालना शुरू किया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया जाए। साथ ही, यह भी कहा जाता है कि उन्होंने सिद्धू को उकसाने का प्रयास किया ताकि वे विवादास्पद बयान दें। इस रणनीति में चन्नी सफल रहे, और आलाकमान ने सिद्धू से नाराज होकर चन्नी को मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित कर दिया।
हालांकि, यह दांव कांग्रेस के लिए उलटा साबित हुआ। जाट सिखों के प्रभाव वाले राज्य में दलित मुख्यमंत्री बनाना एक बड़ा जोखिम था, जो बुरी तरह विफल रहा। कांग्रेस ने 117 विधानसभा सीटों में से केवल 19 सीटें जीतीं। आलाकमान को उम्मीद थी कि कांग्रेस लगातार दो बार सरकार बनाएगी, लेकिन कैप्टेन की विदाई और जाट सिख मतदाताओं की नाराजगी ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
चरणजीत सिंह चन्नी खुद भी अपनी पारंपरिक चमकौर साहिब सीट और भदौड़ सीट से चुनाव हार गए। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी जीत हुई, लेकिन उनकी लोकप्रियता और प्रबंधन की वास्तविकता सामने आ गई। पंजाब में लगभग 33 प्रतिशत दलित वोट हैं, और कांग्रेस को इस वोट की उम्मीद है, लेकिन वह चन्नी का चेहरा घोषित करके जाट सिखों को नाराज नहीं करना चाहती।
कांग्रेस के नेता मानते हैं कि दलित और मुस्लिम वोट स्वाभाविक रूप से पार्टी को मिलेंगे। एक नेता ने कहा कि पिछले चुनाव के बाद से देश में स्थितियां बदल गई हैं, और दलित व मुस्लिम का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ा है। इसलिए, कांग्रेस चन्नी पर भरोसा नहीं कर रही है। जानकार नेताओं का कहना है कि चन्नी चाहे जितना दबाव बनाएं, वे पार्टी नहीं तोड़ सकते। चुनावी साल में कुछ विधायकों का इधर-उधर होना अलग बात है, लेकिन वे अलग पार्टी बनाने की सोच नहीं रहे हैं।
