चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों में सियासी हलचल: क्या है नतीजों का असर?
चुनाव परिणामों का सियासी प्रभाव
नई दिल्ली: हाल ही में चार राज्यों में विधान परिषद चुनावों के परिणामों ने राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कुल 28 सीटों पर मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से हुआ। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए यहां के परिणामों को सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 11 में से 10 सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं।
भाजपा ने 6 सीटें जीती हैं, जबकि सपा ने 4 सीटों पर विजय प्राप्त की है। वाराणसी ग्रेजुएट सीट पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित है, जहां सपा के उम्मीदवार ने बढ़त बनाई हुई है। इससे पहले भाजपा वाराणसी की टीचर सीट भी हार चुकी है। पीएम मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में सपा की लगातार दो जीत ने लखनऊ में चर्चा को तेज कर दिया है।
अखिलेश यादव का मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया
मोदी के बयान पर अखिलेश का जवाब
पीएम मोदी ने चुनाव परिणामों पर चुटकी लेते हुए कहा कि चार राज्यों में 28 सीटों पर मतदान हुआ, सोचिए कांग्रेस कितनी सीटें जीत पाई? इस पर अखिलेश यादव ने उत्तर दिया कि बनारस में हार के बाद भाजपा घबराई हुई है और लखनऊ के नेता दिल्ली का फोन नहीं उठा रहे हैं। कांग्रेस ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को दोहराया है।
बिहार में जन सुराज की एंट्री
बिहार में जन सुराज की एंट्री
बिहार की 8 सीटों में से NDA को 4 सीटें मिली हैं। एक-एक सीट जन सुराज और राजद के खाते में गई, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। टीचर कोटे की चारों सीटों पर पुराने चेहरे हार गए। पटना टीचर सीट पर राजद के संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को हराया। दरभंगा में जन सुराज के सुरेश राय ने कांग्रेस के मदन मोहन झा को मात दी।
महाराष्ट्र और कर्नाटक की स्थिति
महाराष्ट्र-कर्नाटक का हाल
महाराष्ट्र में 5 सीटों में अमरावती से शिवसेना के किरण सरनाईक, पुणे टीचर से भाजपा के कौस्तुभ गावडे, पुणे ग्रेजुएट से NCP-SP की हर्षदा देशमुख और नागपुर से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत हासिल की। वहीं, कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली, सभी चार सीटें भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने जीतीं।
