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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: नए वोटरों के लिए फॉर्म-6 में बदलाव

चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में Annexure-D की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय उन राज्यों में लागू होगा जहां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग का कहना है कि पहले ही परिवारों की मैपिंग हो चुकी है, इसलिए अब अतिरिक्त घोषणा पत्र की आवश्यकता नहीं है। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और इससे प्रभावित होने वाले मतदाताओं की समस्याएं।
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नई दिल्ली में चुनाव आयोग का निर्णय


नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब नए मतदाताओं को फॉर्म-6 के साथ Annexure-D, यानी अतिरिक्त घोषणा पत्र, प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। आयोग ने उन राज्यों में जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऑनलाइन फॉर्म-6 से इस अतिरिक्त शर्त को हटा दिया है और पुराने फॉर्म को पुनः लागू किया है।


विवाद का कारण

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 के मूल प्रारूप में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। विवाद तब उत्पन्न हुआ जब SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र को अनिवार्य कर दिया गया। इस घोषणा पत्र में आवेदक को यह बताना पड़ता था कि क्या साल 2000 के आसपास हुए पिछले SIR के दौरान उसके, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम वोटर लिस्ट में था। इसके साथ ही विधानसभा क्षेत्र का नंबर, बूथ नंबर और सीरियल नंबर जैसी जानकारी भी देनी पड़ रही थी।


नए मतदाताओं की समस्याएं

ECINET पोर्टल पर यह घोषणा पत्र तकनीकी रूप से वैकल्पिक बताया गया था, लेकिन इसे भरे बिना फॉर्म सबमिट नहीं हो रहा था। इससे खासकर 18 साल के नए युवा मतदाताओं को काफी कठिनाई हो रही थी, जिनके परिवार का पुराना रिकॉर्ड खोजना मुश्किल था। जिन लोगों के नाम पहले वोटर लिस्ट से हट गए थे, उन्हें भी दोबारा जुड़ने में परेशानी आ रही थी।


गैर-SIR राज्यों में पुराना फॉर्म-6

अब जो निर्णय लिया गया है, उसके अनुसार गैर-SIR राज्यों में पुराना फॉर्म-6 ही लागू होगा। इसमें केवल सामान्य जानकारी और उम्र व निवास का प्रमाण देना होगा। माता-पिता या दादा-दादी की पुरानी वोटर लिस्ट की जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है। आयोग का तर्क है कि SIR प्रक्रिया में पहले ही परिवारों की मैपिंग हो चुकी है और माता-पिता का डेटा डिजिटली दर्ज है, इसलिए अब अलग से घोषणा पत्र की आवश्यकता नहीं है।


आयोग के भीतर मतभेद

सूत्रों के अनुसार, आयोग के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद थे। दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी कि वोटर रजिस्ट्रेशन नियम 1960 के तहत फॉर्म-6 में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, चुनाव आयोग इसे स्वयं से अनिवार्य नहीं कर सकता। विवाद बढ़ने के बाद आयोग ने सहमति बनाते हुए गैर-SIR राज्यों से Annexure-D को हटा दिया है। अब यह अतिरिक्त घोषणा पत्र केवल उन्हीं राज्यों में लागू रहेगा जहां अभी भी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया चल रही है।