चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: ममता बनर्जी को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग का निर्णय
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो गुटों के बीच चल रहे विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दोनों पक्षों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अब ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से जाना जाएगा और उन्हें चुनाव चिह्न के रूप में ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ दिया गया है। वहीं, बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और इस गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
सिंबल फ्रीज होने के बाद नया चिह्न
चुनाव आयोग ने पहले टीएमसी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ (दो फूल और घास) को फ्रीज कर दिया था। दोनों गुटों ने आयोग के समक्ष तीन-तीन प्राथमिक विकल्प प्रस्तुत किए थे। आयोग ने गहन समीक्षा के बाद दोनों धड़ों को आगामी उपचुनावों के लिए नए नाम और चिह्न के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968’ के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत ठोस निर्णय की आवश्यकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पक्ष ‘तृणमूल कांग्रेस’ के मूल नाम या ‘जोड़ा फूल’ चिह्न का उपयोग नहीं कर सकेगा।
ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक चुनौती
1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से ‘जोड़ा फूल’ तृणमूल कांग्रेस की पहचान रहा है। इस चिह्न का छिनना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक झटका माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में शुरू हुई अंदरूनी कलह ने विकराल रूप ले लिया, जब दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने बगावत कर दी।
बागी विधायकों की गतिविधियाँ
विधानसभा में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के सोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना, जिसे स्पीकर से मान्यता भी मिली। इसके बाद टीएमसी की पूर्व वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने बगावत करते हुए एक अलग दल का गठन किया और एनडीए को समर्थन दिया। अब दोनों गुटों की असली राजनीतिक ताकत आगामी उपचुनावों में नए चुनावी चिह्नों के साथ परखी जाएगी।
