चुनाव आयोग ने RTI के तहत सॉफ्टवेयर जानकारी देने से किया इनकार
चुनाव आयोग का विवादास्पद निर्णय
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए उपयोग किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से मना कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने RTI के जवाब में कहा कि यह जानकारी ट्रेड सीक्रेट और इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी से संबंधित है, जिसे RTI कानून के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। आयोग ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि क्या वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या मशीन लर्निंग का उपयोग किया गया था।
चुनाव आयोग के उत्तर पर सवाल
सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन: आयोग ने सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार किया, RTI कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के लिए नया सॉफ्टवेयर न तो विकसित किया गया और न ही खरीदा गया।
क्या सॉफ्टवेयर खुद गड़बड़ियां पहचानता है: आयोग ने इस सवाल का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और इसे स्पष्टीकरण मांगने वाला सवाल बताया।
AI या मशीन लर्निंग का उपयोग: आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वोटर लिस्ट की जांच में AI, मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग हुआ या नहीं।
सॉफ्टवेयर से नाम हटाने के सवाल पर: आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय संबंधित क्षेत्र के ERO द्वारा किया जाता है।
चिह्नित रिकॉर्ड की समीक्षा: चुनाव आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के ERO की जिम्मेदारी होती है।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर ECINET सॉफ्टवेयर से संबंधित जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि इस सॉफ्टवेयर को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने विकसित किया, लेकिन आयोग ने इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की। उन्होंने SIR और मतदाता सूची में संशोधन के दौरान AI के उपयोग पर भी सवाल उठाए।
चुनाव आयुक्तों की आपत्ति
हाल ही में RTI एक्टिविस्ट लोकेश के. बत्रा को मिले जवाब से पता चला कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर डिप्टी इलेक्शन कमीश्नर मनीष गर्ग के कामकाज पर सवाल उठाए थे।
दोनों आयुक्तों ने अधिकारियों के बीच काम बांटने के आदेश पर आपत्ति जताई थी, यह कहते हुए कि यह आदेश चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना जारी किया गया।
