चुनाव आयोग में विवाद: तेजस्वी यादव ने उठाए गंभीर सवाल
चुनाव आयोग में चल रहा विवाद
चुनाव आयोग में मतभेद: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों चुनाव आयोग में चल रहे विवादों और SIR पर बहस के कारण सुर्खियों में हैं। विपक्ष, भाजपा और ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हैं। विपक्ष के नेता उनके इस्तीफे और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस संदर्भ में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि चुनाव आयोग देश और लोकतंत्र के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है।
तेजस्वी यादव ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मैं लगातार 6 साल से कह रहा हूँ कि चुनाव आयोग देश और लोकतंत्र के लिए कैंसर बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की लोकप्रियता कहीं नहीं है। गोदी मीडिया के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स खरीदकर, ये केवल चुनावी मैच को फिक्स कर रहे हैं। खेल के नियमों और फेयर प्ले से इनका कोई लेना-देना नहीं है।"
लगातार 6 साल से कह रहा हूँ कि चुनाव आयोग देश और लोकतंत्र के लिए कैंसर बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की जमीन पर कहीं कोई लोकप्रियता नहीं है। गोदी मीडिया के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स खरीद, ये केवल मैच रेफ़री और अंपायर को फिक्स कर बेईमानी से चुनावी मैच जीत रहे है। खेल के… pic.twitter.com/Kq9cco5Raq
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 27, 2026
तेजस्वी ने आगे कहा, "अगर चुनाव जनता की मदद से जीतते तो विजयी राज्यों में जनाधार वाले भाजपाई नेताओं को मुख्यमंत्री बनाते? राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, बिहार, बंगाल जैसे राज्यों में इन्होंने केवल कठपुतली मुख्यमंत्री बनाए हैं क्योंकि मोदी-शाह जानते हैं कि इन राज्यों में चुनाव आयोग के समर्थन से ही कथित जीत हासिल की गई है।"
विवाद का कारण
भारत चुनाव आयोग तीन सदस्यों से मिलकर बनता है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों के खिलाफ 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं। कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी का आरोप है कि महत्वपूर्ण निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए हैं। यह विवाद 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) पर केंद्रित है, जिसका प्रभाव 13 करोड़ मतदाताओं के नामों पर पड़ रहा है। चुनाव आयुक्तों ने नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए 'फॉर्म 6' में किए गए 'अनधिकृत और गैर-कानूनी' बदलावों को चुनौती दी है और वोटर लिस्ट डेटाबेस के "धीरे-धीरे सेंट्रलाइजेशन" को लेकर चिंताएं व्यक्त की हैं।
