छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकृत
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन, कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया। यह चर्चा लगभग 14 घंटे 30 मिनट तक चली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह प्रस्ताव प्रदेश की जनता के जनादेश के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए कई योजनाओं का कार्यान्वयन कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों को केवल वोट बैंक के रूप में देखने का आरोप लगाया। साय ने दावा किया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में 70 से अधिक सीटें जीतेगी।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर घोटालों और चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्षी विधायकों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का उपयोग करने की सलाह दी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को किसानों, खाद संकट और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में खाद की कमी है और धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
डॉ. चरणदास महंत ने हसदेव अरण्य में कोयला खनन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को नुकसान होगा। उन्होंने सरकार पर उद्योगों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नकली मंगलसूत्र वितरित करने का मामला उठाया। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।
सत्तापक्ष के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार को घोटालों की सरकार बताया। विधानसभा सचिवालय के रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक 10 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है, जिसमें संबंधित सरकारें बहुमत साबित करने में सफल रही हैं।
विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली। 2022 में भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे 32 मिनट चर्चा हुई थी।
