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जंतर मंतर पर प्रदर्शन: राहुल गांधी का आरोप और सरकार का खंडन

जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और राहुल गांधी के बीच तीखी बहस चल रही है। राहुल गांधी का कहना है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पैलेट गन से गोलियां चलाई गईं, जबकि सरकार इसका खंडन कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त की है कि कम से कम 10 लोग घायल हुए हैं। यह मामला संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
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जंतर मंतर पर गोलीबारी का विवाद


भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार का कहना है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी नहीं हुई। इसके विपरीत, राहुल गांधी का दावा है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पैलेट गन से गोलियां चलाई गईं। इस मुद्दे पर जवाब मांगने के लिए उन्होंने और अन्य विपक्षी दलों ने संसद को कई दिनों तक ठप्प रखा। राहुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पैलेट गन से घायल साहिल लोचब को भी पेश किया। इस बीच, खबरें आई हैं कि कम से कम 10 लोग पैलेट गन के छर्रे से घायल हुए हैं।


आरटीआई से मिली जानकारी

सूचना के अधिकार कानून के तहत तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने दिल्ली के लेडी हार्डिंग और अन्य अस्पतालों से जानकारी मांगी। इससे पहले, सीआरपीएफ ने इस मामले की आंतरिक जांच की थी, जिसमें यह सामने आया था कि आरएएफ ने पैलेट गन से फायरिंग की थी। अब आरटीआई से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभिन्न अस्पतालों में कम से कम 10 घायलों का इलाज किया गया। इससे विपक्ष को संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने से पहले एक महत्वपूर्ण अवसर मिला है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि छात्रों पर पैलेट गन से गोलियां क्यों चलाई गईं और केंद्र सरकार ने इतने समय तक इस बात से इनकार क्यों किया।