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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की 7वीं वर्षगांठ: सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने की सातवीं वर्षगांठ पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस अवसर पर अमरनाथ यात्रा को रोक दिया गया है और पीडीपी के कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। जानें इस संवेदनशील स्थिति में प्रशासन की रणनीतियों और पीडीपी के विरोध प्रदर्शन की योजनाओं के बारे में।
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सुरक्षा के कड़े प्रबंध

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने की आज सातवीं वर्षगांठ है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर घाटी में किसी भी प्रकार के तनाव या अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एहतियात के तौर पर अमरनाथ यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। इसके साथ ही, इस दिन के विरोध में सड़क पर उतरने की योजना बना रही पीडीपी (PDP) पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती सहित कई वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है।


श्रद्धालुओं को मिली राहत

बालटाल बेस कैंप से श्रद्धालुओं को मिली राहत
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से घाटी की ओर जाने वाले अमरनाथ यात्रियों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है। इसके अलावा, जो श्रद्धालु दर्शन करके लौट रहे हैं, उनके काफिले को भी जम्मू की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि, प्रशासन ने उन यात्रियों को थोड़ी राहत दी है जो पहले से उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप में मौजूद हैं। उन्हें वहां से पवित्र गुफा की ओर आगे बढ़ने की इजाजत दे दी गई है।


पीडीपी का विरोध प्रदर्शन

पीडीपी ने किया था विरोध प्रदर्शन और ब्लैकआउट का ऐलान
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने 5 अगस्त के अवसर पर जम्मू-कश्मीर में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। पार्टी की मुख्य मांग राज्य का विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) बहाल करना और सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करना है। इसके लिए पीडीपी ने जिलेवार तरीके से विरोध दर्ज कराने के साथ ही 15 मिनट के सांकेतिक 'ब्लैकआउट' का भी प्रस्ताव रखा था। लेकिन प्रशासन ने हालात बिगड़ने की आशंका के चलते किसी भी प्रकार के औपचारिक प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।


सुरक्षा बलों की तैनाती

चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों का पहरा
घाटी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। श्रीनगर में पीडीपी मुख्यालय और अन्य संवेदनशील इलाकों के आसपास पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों की भारी तैनाती की गई है। लोगों की आवाजाही पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई भी संगठन भीड़ जुटाकर प्रदर्शन न कर सके। महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं की नजरबंदी प्रशासन की इसी रणनीति का हिस्सा है।


ऐतिहासिक फैसला

5 अगस्त 2019 को लिया गया था ऐतिहासिक फैसला
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संसद के माध्यम से ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो अलग-अलग केंद्र-शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था। मौजूदा राजनीतिक स्थिति में, सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस अब केवल पूर्ण राज्य का दर्जा वापस पाने की मांग कर रही है, जबकि पीडीपी अनुच्छेद 370 की बहाली पर अड़ी हुई है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस नए रुख का कड़ा विरोध कर रही है।