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जम्मू-कश्मीर में वक्फ बोर्ड की खुतबे की पहल पर राजनीतिक विवाद

जम्मू-कश्मीर में वक्फ बोर्ड द्वारा मस्जिदों में खुतबे के विषयों में एकरूपता लाने की पहल ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर बीजेपी पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। जानें इस मुद्दे पर क्या कहा गया है और इसके पीछे की राजनीति क्या है।
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राजनीतिक विवाद का बढ़ता ताप


श्रीनगर। जुमे की नमाज के दौरान मस्जिदों में दिए जाने वाले खुतबे के विषयों में एकरूपता लाने के लिए जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की पहल ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर मुस्लिम धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।


जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने मस्जिदों और दरगाहों में जुमे के खुतबे के लिए समान विषय निर्धारित करने की योजना बनाई है। इसके लिए मुफ्तियों, इमामों और खतीबों की एक समिति बनाने का प्रस्ताव है। ये समितियां हर शुक्रवार के लिए सामान्य विषयों की पहचान करेंगी। वक्फ बोर्ड का कहना है कि इसका उद्देश्य धार्मिक जागरूकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। डॉ. दरख्शां अंदराबी, जो इस बोर्ड की चेयरपर्सन हैं, ने बताया कि विषय धार्मिक विद्वानों की समिति द्वारा तय किया जाएगा, और अन्य अधिकारियों का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।


उमर अब्दुल्ला का विरोध


मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर इस पहल का विरोध करते हुए इसे “मुसलमानों के धार्मिक मामलों में बीजेपी का हस्तक्षेप” बताया। उन्होंने वक्फ बोर्ड की BJP-नियुक्त चेयरपर्सन से इस पहल को तुरंत रोकने की मांग की।


इस मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला के साथ PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और कुछ धार्मिक संगठनों ने भी आपत्ति जताई है। मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) ने कहा है कि धार्मिक मार्गदर्शन का निर्णय उलेमा, इमाम और मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्थाओं के दायरे में होना चाहिए। वक्फ बोर्ड ने इसे राजनीतिक नियंत्रण के बजाय सामाजिक और धार्मिक जागरूकता बढ़ाने की पहल बताया है। इस प्रकार, विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि खुतबे के विषयों में तालमेल की यह व्यवस्था धार्मिक मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप है या मार्गदर्शन।