जेपी मॉर्गन के CEO ने भारत के तेल खरीद पर अमेरिका को दी चेतावनी
भारत के समर्थन में जेपी मॉर्गन का बयान
मुंबई: रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने के मामले में भारत पर बढ़ते पश्चिमी दबाव के बीच, जेपी मॉर्गन चेज के चेयरमैन और सीईओ जेमी डिमॉन ने भारत का समर्थन किया है। डिमॉन ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि नई दिल्ली के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले वॉशिंगटन को इसके वैश्विक प्रभावों को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना उचित विचार के उठाए गए कदम न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी संकट में डाल सकते हैं।
अमेरिकी नीति निर्माताओं के लिए सलाह
‘भारतीय रिफाइनरियों की जरूरतों को समझें’
मुंबई में आयोजित 'जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस' में सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत करते हुए, जेमी डिमॉन ने कहा कि अमेरिकी नीति निर्माताओं को वास्तविकता का आकलन करना चाहिए। उन्होंने कहा, "वॉशिंगटन को यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूस से प्राप्त कच्चे तेल का कैसे उपयोग करती हैं।" डिमॉन ने बताया कि रूस से आयातित तेल का एक बड़ा हिस्सा भारतीय घरेलू जरूरतों के लिए रिफाइन किया जाता है, और कुछ रिफाइनरियों के विशेष कॉन्फ़िगरेशन के अनुसार खरीदा जाता है। यदि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करता है, तो उसे अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जो संभवतः भारतीय संयंत्रों के तकनीकी ढांचे के अनुकूल नहीं होंगे।
नए अमेरिकी कानून का संदर्भ
100% टैरिफ वाले नए अमेरिकी कानून के बीच आया बयान
जेमी डिमॉन की यह टिप्पणी उस समय आई है जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों से संबंधित नया कानून पारित किया है। इस कानून के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामानों पर 100% तक का भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं। डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन का समर्थन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसे ध्यान में रखना चाहिए कि इससे वैश्विक तेल बाजार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत का स्पष्ट रुख: ऊर्जा सुरक्षा और हितों से कोई समझौता नहीं
यूक्रेन संघर्ष के बाद से, भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से रूसी तेल खरीद घटाने का दबाव बढ़ा है। हालांकि, भारत ने हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन आपत्तियों को खारिज किया है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के नाते, भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि किसी तीसरे देश द्वारा व्यापार पर पाबंदी लगाने की कोशिश द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकती है, और भारत अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
