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झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के नए संकेत

झारखंड के हालिया राज्यसभा चुनाव ने कई दिलचस्प रुझान प्रस्तुत किए हैं, जिसमें भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग का मामला सामने आया है। सभी पार्टियों के पोलिंग एजेंटों के दावों के बावजूद, नाथवानी को अतिरिक्त वोट कैसे मिले, यह एक बड़ा सवाल है। जानें इस चुनाव में क्या हुआ और किसने किसके पक्ष में वोट किया।
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झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के नए संकेत

राज्यसभा चुनाव में उभरे नए ट्रेंड


झारखंड के हालिया राज्यसभा चुनाव ने कई रोचक रुझान प्रस्तुत किए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि भाजपा द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पक्ष में किसने क्रॉस वोटिंग की। आमतौर पर, राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग की जानकारी तुरंत मिल जाती थी, क्योंकि हर विधायक को अपना वोट पार्टी के पोलिंग एजेंट को दिखाना होता है। पोलिंग एजेंट को पार्टी का सबसे विश्वसनीय सदस्य बनाया जाता है ताकि वह तुरंत अलर्ट कर सके। लेकिन इस बार, हर पार्टी का पोलिंग एजेंट यह दावा कर रहा है कि उनके विधायकों ने महागठबंधन के जेएमएम के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणब झा को वोट दिया। यह सवाल उठता है कि यदि सभी ने पार्टी की निर्धारित लाइन पर वोट किया, तो नाथवानी को अतिरिक्त पांच वोट कैसे मिले?


मतदान के तुरंत बाद, जेएमएम और कांग्रेस ने चुपचाप कहा कि राजद और सीपीआई माले ने क्रॉस वोटिंग की है। ध्यान देने योग्य है कि राजद के चार और माले के दो विधायक हैं। लेकिन बाद में, राजद ने जोरदार प्रतिक्रिया दी। राजद के मंत्री संजय यादव और प्रदेश अध्यक्ष जनार्दन पासवान ने कहा कि कांग्रेस के सदस्यों ने खुद क्रॉस वोटिंग की है और राजद पर आरोप लगा रहे हैं। राजद ने माले का भी समर्थन किया। माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर कहा कि उनके दोनों विधायकों ने कांग्रेस को वोट दिया। जेएमएम के पूर्व मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर चुनाव एजेंट थे, जबकि कांग्रेस के प्रभारी राजू भी एजेंट बने थे। दोनों का दावा है कि उनके विधायकों ने निर्धारित लाइन पर वोट किया। फिर भी, नाथवानी को पांच वोट अधिक मिले। यह मामला व्यक्तिगत क्रॉस वोटिंग का नहीं, बल्कि संस्थागत क्रॉस वोटिंग का प्रतीत होता है। पार्टियों ने स्वयं तय किया कि क्रॉस वोटिंग करानी है। इसी कारण पोलिंग एजेंट क्रॉस वोटिंग करने वाले का नाम नहीं बता रहे हैं। ध्यान रहे, यदि विधायक पोलिंग एजेंट को बैलेट नहीं दिखाते हैं, तो उनका वोट अवैध हो जाएगा। तीन वोट अवैध हुए, लेकिन यह आधार नहीं था कि उन्हें पोलिंग एजेंट को नहीं दिखाया गया।